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(PRELIMS  Focus)


साहित्य में नोबेल पुरस्कार 2025 (Nobel Prize in Literature)

श्रेणी: विविध

प्रसंग:

साहित्य में नोबेल पुरस्कार 2025 के बारे में:

स्रोत:


सरोगेसी (Surrogacy)

श्रेणी: राजनीति और शासन

प्रसंग:

भारत में सरोगेसी के बारे में:

सरोगेसी के प्रकार और रूप:

स्रोत:


रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance (AMR)

श्रेणी: विज्ञान और प्रौद्योगिकी

प्रसंग:

रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) के बारे में:

       

स्रोत:


संयुक्त राष्ट्र शांति सेना (UN Peacekeeping Force)

श्रेणी: अंतर्राष्ट्रीय संबंध

प्रसंग:

संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के बारे में:

स्रोत:


तेजस Mk1A लड़ाकू जेट (Tejas Mk1A Fighter Jet)

श्रेणी: रक्षा और सुरक्षा


(MAINS Focus)


भारत-यूके एफटीए: व्यापार से परे सेतु निर्माण (India–UK FTA: Building Bridges Beyond Trade)

(जीएस पेपर 2: भारत और उसके द्विपक्षीय संबंध - भारत और यूनाइटेड किंगडम)

संदर्भ (परिचय)

भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) द्विपक्षीय सहयोग के एक नए युग का प्रतीक है, जो व्यापार उदारीकरण को प्रतिभा और नवाचार के आदान-प्रदान के साथ जोड़ता है। इसकी असली क्षमता आर्थिक संबंधों को स्थायी जन-केंद्रित साझेदारियों में बदलने में निहित है।

नव गतिविधि

आलोचनाएँ और चुनौतियाँ

सुधार और आगे की राह 

निष्कर्ष

भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (FTA) केवल एक व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि खंडित विश्व में समग्र जुड़ाव का एक खाका है। इसकी स्थायित्व सतत वितरण, पारस्परिक खुलेपन और गतिशीलता, निवेश एवं शिक्षा के क्षेत्र में विश्वास पर निर्भर करेगी। व्यापार को प्रतिभा, जलवायु और संस्कृति से जोड़कर, भारत और ब्रिटेन एक ऐसी साझेदारी का निर्माण कर सकते हैं जो समतापूर्ण वैश्वीकरण और साझा समृद्धि का प्रतीक हो।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता व्यापार-केंद्रित संबंधों से ज्ञान और सततता पर आधारित व्यापक साझेदारी की ओर बदलाव को दर्शाता है। चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)


हाथी दांत और तनाव: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम में संशोधन के लिए केरल का कदम (Tusks and Tensions: Kerala’s Move to Amend the Wildlife (Protection) Act)

(जीएस पेपर 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन)

संदर्भ (परिचय)

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में केरल द्वारा प्रस्तावित संशोधन – राज्य को कुछ प्रजातियों को ‘पीड़क (vermin)’ घोषित करने का अधिकार प्रदान करना – भारत के पर्यावरण शासन में एक महत्वपूर्ण संघीय क्षण को चिह्नित करता है, जो स्थानीय संकट को राष्ट्रीय संरक्षण सुरक्षा उपायों के साथ संतुलित करता है।

मुख्य तर्क और घटनाक्रम

आलोचनाएँ और चिंताएँ

सुधार और आगे की राह 

निष्कर्ष

केरल का यह कदम पारिस्थितिक संकट की पुकार और केंद्रीकृत पर्यावरणीय संघवाद के लिए चुनौती , दोनों को दर्शाता है । मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने की तात्कालिकता से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इससे संरक्षण अखंडता के सिद्धांत से समझौता नहीं किया जाना चाहिए । वास्तविक हस्तांतरण राज्यों को साधनों, आंकड़ों और पारदर्शिता से सशक्त बनाना चाहिए , न कि मनमाने बहिष्कार की शक्तियों से। संघीय स्वायत्तता को पारिस्थितिक तर्क को मजबूत करना चाहिए, न कि उसका स्थान लेना चाहिए।

मुख्य परीक्षा प्रश्न:

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में संशोधन करने का केरल का कदम राज्य की स्वायत्तता और राष्ट्रीय पारिस्थितिक सुरक्षा उपायों के बीच संतुलन पर प्रश्न उठाता है। परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

 

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