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(PRELIMS  Focus)


मेजराना कण (Majorana Particles)

श्रेणी: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

प्रसंग:  मेजराना कण और क्वांटम कंप्यूटिंग

मेजराना कण क्या हैं?

मेजराना क्वांटम सूचना की सुरक्षा कैसे करते हैं

यह क्यों मायने रखता है

Learning Corner:

क्वांटम कम्प्यूटिंग

स्रोत: द हिंदू


भारत में थिएटर कमांड (Theatre Commands in India)

श्रेणी: रक्षा

संदर्भ : यह भारत के सशस्त्र बलों को अधिक चुस्त, एकीकृत और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में एक बड़े बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है।

थिएटर कमांड क्या है?

तर्क और लाभ

वैश्विक संदर्भ

प्रगति और बहस

चुनौतियां

कार्यान्वयन

स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस


यूएपीए (UAPA)

श्रेणी: राजनीति

प्रसंग: दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में यूएपीए के तहत कई आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि आरोपियों ने एक पूर्व नियोजित साजिश रची थी और जमानत के स्तर पर आरोपों का समर्थन करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद थे।

जमानत अस्वीकार करने के कारण

आरोप और अभियोजन

न्यायिक तर्क

स्वतंत्रता संबंधी चिंताएँ

महत्व

Learning Corner:

गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (Unlawful Activities (Prevention) Act -UAPA)

पृष्ठभूमि

प्रमुख प्रावधान

  1. आतंकवादी कृत्य की परिभाषा (धारा 15):
    • इसमें भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा को खतरा पहुंचाने या लोगों में आतंक पैदा करने के इरादे से किए गए कार्य शामिल हैं।
  2. आतंकवादी संगठन (धारा 35 और 36):
    • केन्द्र सरकार संगठनों को “आतंकवादी संगठन” घोषित कर सकती है और उन पर प्रतिबंध लगा सकती है।
  3. व्यक्तिगत आतंकवादी टैग (2019 संशोधन):
    • सरकार किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित कर सकती है (न्यायिक निगरानी के बिना)।
  4. विस्तारित हिरासत और जमानत प्रतिबंध (धारा 43 डी( 5)):
    • बिना आरोप पत्र दाखिल किये 180 दिनों तक हिरासत में रखने की अनुमति देता है ।
    • यदि न्यायालय को लगता है कि आरोप प्रथम दृष्टया सत्य हैं तो जमानत देने से इंकार किया जा सकता है , तथा इसके लिए न्यूनतम सीमा निर्धारित की जा सकती है।
  5. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की शक्तियां:
    • राज्य की सहमति के बिना पूरे भारत में यूएपीए मामलों की जांच करने का अधिकार।
  6. तलाशी, जब्ती और संपत्ति कुर्की:
    • सरकार आतंकवाद से जुड़ी संदिग्ध संपत्ति को जब्त कर सकती है।

विवादास्पद मुद्दे

न्यायिक रुख

स्रोत : द इंडियन एक्सप्रेस


राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी)

श्रेणी: पर्यावरण

प्रसंग: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) को उच्च हिमालय को पारिस्थितिकी-संवेदनशील क्षेत्र (ईएसजेड) घोषित करने के संबंध में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के हलफनामों की समीक्षा करने का निर्देश दिया है।

प्रमुख बिंदु

Learning Corner:

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी)

प्रमुख विशेषताऐं

  1. क्षेत्राधिकार:
    • पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (1986), वन संरक्षण अधिनियम (1980), वायु अधिनियम (1981), जल अधिनियम (1974), जैव विविधता अधिनियम (2002) आदि कानूनों के तहत दीवानी मामलों को संभालता है।
    • इसमें वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और भारतीय वन अधिनियम, 1927 शामिल नहीं हैं।
  2. संघटन:
    • अध्यक्ष (सर्वोच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश)।
    • न्यायिक सदस्य और विशेषज्ञ सदस्य (पर्यावरण विशेषज्ञ/वैज्ञानिक)।
  3. शक्तियां:
    • सी.पी.सी. के तहत सिविल कोर्ट के समान शक्तियां।
    • राहत, मुआवजा प्रदान कर सकते हैं, तथा क्षतिग्रस्त पारिस्थितिकी की बहाली का आदेश दे सकते हैं।
  4. लागू सिद्धांत:
    • प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle.)
    • एहतियाती सिद्धांत (Precautionary Principle.)
    • सतत विकास (Sustainable Development.)
  5. शीघ्र निपटान:
    • दायर होने के 6 महीने के भीतर निपटाना अनिवार्य है ।
  6. बेंच:
    • प्रधान पीठ: नई दिल्ली।
    • क्षेत्रीय पीठ: भोपाल, पुणे, कोलकाता और चेन्नई।

महत्व

चुनौतियां

स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस


युद्ध अभ्यास 2025 (Yudh Abhyas)

श्रेणी: अंतर्राष्ट्रीय

प्रसंग: भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास युद्ध अभ्यास का 21वां संस्करण 1 से 14 सितंबर 2025 तक फोर्ट वेनराइट, अलास्का में आयोजित किया जा रहा है।

मुख्य अंश

Learning Corner:

भारत का संयुक्त सैन्य अभ्यास

सेना-से-सेना अभ्यास (Army-to-Army Exercises)

नौसेना-से-नौसेना और नौसैनिक अभ्यास (Navy-to-Navy and Naval Exercises)

वायु सेना-से-वायु सेना अभ्यास (Air Force-to-Air Force Exercises)

बहुपक्षीय और बहुसेवा अभ्यास

स्रोत: पीआईबी


(MAINS Focus)


सिकल सेल: विकलांगता न्याय के लिए लड़ाई (Sickle Cell: The Battle for Disability Justice) (जीएस पेपर II - राजनीति और शासन)

परिचय (संदर्भ)

भारत सरकार ने दिव्यांगजन अधिकार (RPWD) अधिनियम, 2016 के तहत संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं

दिशानिर्देश सिकल सेल जीन की दो प्रतियों वाले या सिकल सेल प्लस बीटा थैलेसीमिया/एचबी डी वाले व्यक्तियों में विकलांगता का आकलन करने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करते हैं।

हालाँकि, 4% आरक्षण कोटे से सिकल सेल रोग (SCD) को बाहर रखने से आलोचना शुरू हो गई है और सुधार की मांग उठने लगी है।

सिकल सेल रोग (एससीडी) क्या है?

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की मुख्य विशेषताएं

लाभ

आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम, 2016 और बेंचमार्क विकलांगता

बायोमेडिकल स्कोरिंग पर निरंतर निर्भरता और एस.सी.डी. से पीड़ित लोगों को पूर्ण सुरक्षा से वंचित रखना, अधिनियम के तहत इस स्थिति को मान्यता देने के उद्देश्य को ही कमजोर करता है।

साक्ष्य के बोझ का मुद्दा

आगे की राह

निष्कर्ष

आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम ने समावेशिता और गरिमा का वादा किया था, लेकिन यह अभी भी संकीर्ण जैव-चिकित्सा ढाँचों पर निर्भर है। जब तक सिकल सेल रोग को वास्तविक, आजीवन विकलांगता के रूप में मान्यता नहीं दी जाती और उसे वास्तविक अधिकार और सुरक्षा नहीं दी जाती, तब तक भारत में समावेशिता केवल दिखावे तक सीमित रहने का जोखिम बना रहेगा।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

RPWD अधिनियम, 2016 के तहत विकलांगता अधिकारों तक पहुँचने में सिकल सेल रोग से पीड़ित व्यक्तियों के सामने आने वाली चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण करें। उनका पूर्ण समावेश सुनिश्चित करने के लिए सुधार सुझाएँ। (250 शब्द, 15 अंक)

स्रोत: https://www.thehindu.com/opinion/op-ed/sickle-cell-the-battle-for-disability-justice/article70005373.ece


भारत के हालिया समुद्री सुधारों में सुधार की आवश्यकता (India’s Recent Maritime Reforms Need Course Correction) (GS पेपर III – अर्थव्यवस्था)

परिचय (संदर्भ)

भारत का समुद्री क्षेत्र लंबे समय से औपनिवेशिक काल के खंडित कानूनों द्वारा शासित रहा है। हाल ही में, राज्यसभा ने भारतीय बंदरगाह विधेयक, 2025 पारित किया है , जो भारत के समुद्री विधायी ढाँचे में एक बड़ा बदलाव है।

तटीय नौवहन अधिनियम, 2025 , समुद्री माल परिवहन विधेयक, 2025 , तथा व्यापारिक नौवहन अधिनियम, 2025 के साथ , इस विधायी पैकेज का उद्देश्य औपनिवेशिक युग के कानूनों (विशेष रूप से 1908 के अधिनियम) को प्रतिस्थापित करना तथा भारत के समुद्री क्षेत्र को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ संरेखित करना है।

हालाँकि, संघवाद, स्वामित्व सुरक्षा, विनियामक अतिक्रमण और छोटे अभिकर्ताओं पर प्रभाव के संबंध में चिंताएं उभरी हैं।

भारतीय बंदरगाह विधेयक, 2025

आलोचना

मर्चेंट शिपिंग अधिनियम, 2025

आलोचना

तटीय नौवहन अधिनियम, 2025 (Coastal Shipping Act)

आलोचना

आगे की राह

निष्कर्ष

भारत के समुद्री सुधार निस्संदेह अपने कानूनों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने और अपनी 7,500 किलोमीटर लंबी तटरेखा की क्षमता को उजागर करने के लिए आवश्यक हैं। फिर भी, आधुनिकीकरण संघीय संतुलन, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और संप्रभुता सुरक्षा उपायों की कीमत पर नहीं होना चाहिए। राज्यों की स्वायत्तता, न्यायिक स्वतंत्रता और छोटे ऑपरेटरों के संरक्षण का सम्मान करने वाला एक संतुलित दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करेगा कि समुद्री सुधार वास्तव में भारत की दीर्घकालिक समुद्री सुरक्षा और आर्थिक विकास को मज़बूत करें।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

भारत के हालिया समुद्री सुधारों को आधुनिकीकरण की दिशा में एक कदम बताया गया है, लेकिन ये संघीय असंतुलन और नियामकीय अतिक्रमण की चिंताएँ भी पैदा करते हैं। समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। ( 250 शब्द, 15 अंक)

स्रोत: https://www.thehindu.com/opinion/op-ed/indias-recent-maritime-reforms-need-course-correction/article70009149.ece

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