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(PRELIMS  Focus)


कृषि में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (Space Technology in Agriculture)

श्रेणी: कृषि

प्रसंग: अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी परिशुद्ध कृषि (precision farming) को सक्षम बनाकर, उपज अनुमान में सुधार करके, संसाधन उपयोग को अनुकूलित करके और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करके कृषि में क्रांति ला रही है।

प्रमुख अनुप्रयोग:

भारत की पहल:

अंतरिक्ष आधारित कृषि सेवाओं को क्रियान्वित करने के लिए FASAL, CHAMAN, NADAMS और महालनोबिस राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से मार्ग प्रशस्त किया है।

Learning Corner:

FASAL (अंतरिक्ष, कृषि – मौसम विज्ञान और भूमि-आधारित अवलोकनों का उपयोग करके कृषि उत्पादन का पूर्वानुमान)

CHAMAN (भू-सूचना विज्ञान का उपयोग करते हुए समन्वित बागवानी मूल्यांकन और प्रबंधन)

NADAMS (राष्ट्रीय कृषि सूखा आकलन और निगरानी प्रणाली)

कृषि में प्रौद्योगिकी (एग्री-टेक)

प्रौद्योगिकी ने उत्पादकता, स्थायित्व और लाभप्रदता को बढ़ाकर कृषि में क्रांति ला दी है। यह संपूर्ण कृषि मूल्य श्रृंखला में – बुवाई से पहले से लेकर कटाई के बाद तक – एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

रिमोट सेंसिंग और जीआईएस

परिशुद्ध कृषि

इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और स्मार्ट सेंसर

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग

ड्रोन और मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी)

जैव प्रौद्योगिकी और आनुवंशिक इंजीनियरिंग

मोबाइल ऐप्स और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म

रोबोटिक्स और ऑटोमेशन

स्रोत: पीआईबी


भास्कर (BHASKAR)

श्रेणी: अर्थशास्त्र

संदर्भ: भास्कर/ BHASKAR (भारत स्टार्टअप नॉलेज एक्सेस रजिस्ट्री) प्लेटफॉर्म एक व्यापक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र है जिसे भारत के स्टार्टअप परिदृश्य में सहयोग और नवाचार को मजबूत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

प्रमुख विशेषताऐं:

निष्कर्ष:
भास्कर भारत के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक सुरक्षित, समावेशी और स्केलेबल डिजिटल रीढ़ के रूप में कार्य करता है, जो नवाचार, कनेक्टिविटी और विकास को गति देता है।

Learning Corner:

भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने की पहल

भारत विश्व में तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बनकर उभरा है। नवाचार, रोज़गार सृजन और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए, सरकार और संबंधित निकायों ने कई पहल शुरू की हैं:

स्टार्टअप इंडिया पहल (2016)

अटल नवाचार मिशन (एआईएम)

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी में अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट संरक्षण के लिए समर्थन (SIP-EIT)

स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना (2021)

स्टार्टअप्स के लिए फंड ऑफ फंड्स (FFS)

राज्य स्तरीय स्टार्टअप नीतियां

राष्ट्रीय स्टार्टअप पुरस्कार

डिजिटल प्लेटफॉर्म

स्रोत: पीआईबी


71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (71st National Film Awards)

श्रेणी: राजनीति

संदर्भ: 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में 1 जनवरी से 31 दिसंबर, 2023 के बीच प्रमाणित फिल्मों को सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों ने मुख्यधारा और क्षेत्रीय फिल्मों में भारतीय सिनेमा में उत्कृष्टता का जश्न मनाया।

प्रमुख पुरस्कार:

अन्य उल्लेखनीय तथ्य:

सर्वश्रेष्ठ क्षेत्रीय फ़िल्में:

भाषा पतली परत
असमिया रोंगाटापु 1982
बंगाली डीप फ्रिज
कन्नड कंदीलु – आशा की किरण
मलयालम उल्लोझुक्कु
मराठी श्यामची आई
ओडिया पुष्कर
पंजाबी गॉडडे गॉडडे चा
तामिल पार्किंग
तेलुगू भगवंत केसरी
गुजराती वाश

मुख्य अंश:

Learning Corner:

भारत में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का इतिहास

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की स्थापना 1954 में भारत सरकार द्वारा भारतीय सिनेमा में कलात्मक और तकनीकी उत्कृष्टता को सम्मानित करने के लिए की गई थी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत स्थापित इन पुरस्कारों का उद्देश्य सौंदर्यपरक, सांस्कृतिक और शैक्षिक मूल्य वाली फिल्मों के निर्माण को प्रोत्साहित करना है।

प्रमुख उपलब्धियां:

वर्तमान संरचना:

स्रोत: पीआईबी


आर्य समाज विवाह (Arya Samaj Marriages)

श्रेणी: संस्कृति

प्रसंग: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार को “फर्जी आर्य समाज समितियों” के उदय की जांच करने का निर्देश दिया है।

प्रमुख बिंदु:

Learning Corner:

आर्य समाज

आर्य समाज एक हिंदू सुधार आंदोलन था जिसकी स्थापना स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1875 में बंबई (अब मुंबई) में की थी। इसका उद्देश्य वैदिक जीवन पद्धति को पुनर्जीवित करना, अंधविश्वासों, जातिगत भेदभाव और मूर्तिपूजा का खंडन करना और तर्कवाद, समानता और शिक्षा को बढ़ावा देना था।

मुख्य उद्देश्य:

प्रमुख योगदान:

स्रोत : द इंडियन एक्सप्रेस


ब्लूबर्ड (BlueBird)

श्रेणी: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

प्रसंग: इसरो अपने LVM3 (GSLV Mk III) प्रक्षेपण यान का उपयोग करके अमेरिकी-आधारित AST स्पेसमोबाइल द्वारा विकसित ब्लूबर्ड ब्लॉक 2 संचार उपग्रह को लॉन्च करने के लिए तैयार है।

मुख्य तथ्य:

यह मिशन वाणिज्यिक अंतरिक्ष सेवाओं में भारत के बढ़ते प्रभाव और गहन होते अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को दर्शाता है।

Learning Corner:

जीसैट श्रृंखला (भूस्थिर उपग्रह)

भारत की जीसैट (भू-स्थिर उपग्रह) श्रृंखला अंतरिक्ष से भारतीय संचार की रीढ़ है, जिसे इसरो द्वारा दूरसंचार, टेलीविजन प्रसारण, इंटरनेट सेवाओं, सुरक्षित संचार और आपदा प्रबंधन सहायता के लिए विकसित किया गया है।

हालिया जीसैट मिशन:

सीएमएस (संचार उपग्रह) श्रृंखला

स्रोत: द हिंदू


(MAINS Focus)


सरकारी स्कूलों में नामांकन में गिरावट (Falling Enrolment in Government Schools) (GS पेपर II - राजनीति और शासन)

परिचय (संदर्भ)

भारत में सरकारी स्कूल अनेक छात्र-हितैषी लाभ जैसे: निःशुल्क शिक्षा, योग्य और बेहतर वेतन वाले शिक्षक, मध्याह्न भोजन, निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें और यूनिफॉर्म, तथा कम या शून्य शुल्क प्रदान करते हैं।

इसके बावजूद भारत के सरकारी स्कूलों में नामांकन में गिरावट देखी जा रही है, विशेष रूप से शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में।

इसका उत्तर धारणा, नीतिगत अंतराल, संरचनात्मक असमानताओं और सबसे महत्वपूर्ण, एक प्रवेश परीक्षा प्रणाली के जटिल संयोजन में निहित है, जो अनजाने में निजी संस्थानों और शहरी छात्रों को लाभ पहुंचाती है, जबकि ग्रामीण, सरकारी स्कूल के छात्रों को नुकसान में छोड़ देती है।

आइये इस विवरण का विश्लेषण करें।

नामांकन में गिरावट के पीछे मुख्य मुद्दे

धारणा अंतराल (Perception Gap)

शिक्षण माध्यम विभाजन (Medium of Instruction Divide)

प्रवेश परीक्षा पूर्वाग्रह (Entrance Exam Bias)

आवश्यक कदम

प्रवेश परीक्षाओं में सुधार

एनईपी को समान रूप से लागू करें

निजी स्कूलों द्वारा भ्रामक ब्रांडिंग को विनियमित करें

सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार

सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करें

निष्कर्ष

शैक्षिक समानता और राष्ट्रीय विकास के लिए सरकारी स्कूल अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। निजी स्कूलों के प्रति वर्तमान रुझान वास्तविक प्रदर्शन का परिणाम कम और व्यवस्थागत पूर्वाग्रहों और धारणा संबंधी समस्याओं का परिणाम ज़्यादा है। प्रवेश नीतियों, परीक्षा प्रणालियों और पाठ्यक्रम कार्यान्वयन में बदलाव ज़रूरी है ताकि सरकारी स्कूलों को “अंतिम विकल्प” के बजाय “पहली पसंद” बनाया जा सके

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

कल्याणकारी उपायों और सुदृढ़ शैक्षणिक ढाँचों के बावजूद, भारत में सरकारी स्कूलों में नामांकन में गिरावट जारी है। इस प्रवृत्ति के कारणों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। सरकारी स्कूली शिक्षा में जनता का विश्वास बहाल करने के लिए कौन से सुधार आवश्यक हैं? (250 शब्द, 15 अंक)

स्रोत: सरकारी स्कूलों में नामांकन क्यों घट रहा है और इसे कैसे ठीक किया जा सकता है – द हिंदू


भारत में डायन-हंटिंग/ विच हंटिंग (Witch-Hunting in India) (जीएस पेपर 1 - भारतीय समाज, जीएस पेपर II - राजनीति और शासन)

परिचय (संदर्भ)

जुलाई 2024 में बिहार के पूर्णिया में जादू-टोना के आरोप में तीन महिलाओं सहित परिवार के पांच सदस्यों की बेरहमी से हत्या कर दी गई।

भारत के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, वर्ष 2000 से अब तक 2,500 से ज़्यादा महिलाओं को डायन/ भूत बताकर उनकी हत्या कर दी गई है। यह संख्या और भी ज़्यादा होने का अनुमान है, क्योंकि कई मामले तो रिपोर्ट ही नहीं किए जाते।

ये घटनाएं अंधविश्वास, पितृसत्ता और जातिवाद में निहित हिंसा के परेशान करने वाले पैटर्न को दर्शाती हैं।

विच हंटिंग /डायन शिकार क्या है?

विच हंटिंग से तात्पर्य किसी व्यक्ति, विशेषकर महिलाओं पर जादू-टोना करने का आरोप लगाने की प्रथा से है।

जादू-टोना करने के आरोप में महिलाओं को कई तरह की शारीरिक और मानसिक यातनाओं के साथ-साथ फाँसी तक की सज़ा दी जाती है। डायन के आरोप में सज़ा देने के लिए आमतौर पर गंभीर हिंसा का इस्तेमाल किया जाता है , जिसमें बलात्कार, मारपीट, कोड़े मारना और अंग-भंग करना शामिल हो सकता है।

डेटा

डायन-शिकार/ विच हंटिंग अभी भी क्यों जारी है?

परेशान करने वाले रुझान

डायन शिकार से संबंधित कानून

केंद्रीय कानून की आवश्यकता

भारत सरकार को विच हंटिंग की प्रथा पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक सार्वभौमिक कानून बनाना चाहिए, जो समय की मांग है और महिलाओं के शोषण को खत्म करने के लिए चिंता का विषय होने के नाते इस तरह के कृत्यों से शीघ्रता से निपटने के लिए संगठन स्थापित करने चाहिए।

अन्य आवश्यक कदम

निष्कर्ष

भारत में विच हंटिंग केवल अंधविश्वास का अवशेष नहीं है, बल्कि जड़ जमाए पितृसत्ता, जातिगत उत्पीड़न और व्यवस्थागत उपेक्षा की हिंसक अभिव्यक्ति है। ऐसी हिंसा को बनाए रखने वाली सामाजिक वैधता को खत्म करने के लिए कानूनी सुधार, सामुदायिक संवेदनशीलता और संरचनात्मक सशक्तिकरण को साथ-साथ चलना होगा। केवल एक अंतर्विषयक और अधिकार-आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से ही भारत सभी के लिए सम्मान, समानता और न्याय के अपने संवैधानिक वादे को कायम रख सकता है।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

भारत में विच हंटिंग अंधविश्वास, लिंग-आधारित हिंसा, जातिगत भेदभाव और राज्य की विफलता के अंतर्संबंध को दर्शाती है। इस प्रथा को बनाए रखने वाले संरचनात्मक कारकों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। इसे समाप्त करने के लिए एक बहुआयामी रणनीति सुझाइए। (250 शब्द, 15 अंक)

स्रोत:  Caste, patriarchy brand women as witches – The Hindu

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