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(PRELIMS MAINS Focus)


 

रिंडरपेस्ट (Rinderpest)

श्रेणी: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

संदर्भ : आईसीएआर-राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (ICAR-National Institute of High Security Animal Diseases (NIHSAD), भोपाल को विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) और एफएओ द्वारा श्रेणी ए रिंडरपेस्ट होल्डिंग सुविधा (RHF) के रूप में नामित किया जा रहा है।

संदर्भ का दृष्टिकोण:

रिंडरपेस्ट क्या है?

रिंडरपेस्ट या “मवेशी प्लेग” एक घातक पशुधन रोग था, जिसे 2011 में विश्व स्तर पर समाप्त कर दिया गया था। हालांकि, रिंडरपेस्ट वायरस-युक्त सामग्री (आरवीसीएम) अभी भी चुनिंदा प्रयोगशालाओं में संग्रहीत है, जो गलत तरीके से संभाले जाने पर संभावित जैव सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है।

भारत की मान्यता (India’s Recognition)

NIHSAD, भोपाल अब विश्व भर में केवल छह श्रेणी ए आरएचएफ में से एक है , इसके अलावा यूके, यूएसए, फ्रांस, जापान और इथियोपिया में भी ऐसी ही सुविधाएं हैं। यह एक उच्च-नियंत्रण BSL-3 प्रयोगशाला है और 2012 से भारत की राष्ट्रीय आरवीसीएम रिपोजिटरी है।

भारत ने 2019 में इस दर्जे के लिए आवेदन किया था, और मार्च 2025 में गहन अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण के बाद, मई 2025 में 92वें WOAH आम सत्र में इसे आधिकारिक तौर पर आरएचएफ का दर्जा प्रदान किया गया।

महत्व

Learning Corner:

महत्वपूर्ण मानव एवं पशु रोगों की सूची तथा उनके कारक रोगाणुओं की सूची 

  1. वायरल रोग (Viral Diseases)
रोग /बीमारी कारणकारी वायरस
इन्फ्लूएंजा (फ्लू) इन्फ्लूएंजा वायरस (प्रकार ए, बी, सी)
COVID-19 SARS-CoV-2
डेंगी / डेंगू (Dengue) डेंगू वायरस (फ्लेविवायरस)
खसरा (Measles) खसरा वायरस (Paramyxovirus)
कण्ठमाला (Mumps) कण्ठमाला वायरस (Paramyxovirus)
रूबेला (जर्मन खसरा) रूबेला वायरस
रेबीज़ रेबीज़ वायरस (Lyssavirus)
पोलियो पोलियोवायरस (Enterovirus)
हेपेटाइटिस ए और ई एचएवी, एचईवी
हेपेटाइटिस बी और सी एचबीवी (डीएनए), एचसीवी (आरएनए)
एचआईवी/एड्स मानव प्रतिरक्षी न्यूनता विषाणु (Human Immunodeficiency Virus)
चेचक/ Smallpox (उन्मूलन) वेरियोला वायरस (Variola virus)
Chickenpox वैरिसेला जोस्टर विषाणु (Varicella-Zoster virus)
रिंडरपेस्ट (उन्मूलन) Rinderpest virus (Morbillivirus)
खुरपका-मुंहपका रोग (Foot-and-Mouth Disease) FMD virus (Aphthovirus)

 

  1. जीवाणु जनित रोग (Bacterial Diseases)
रोग /बीमारी कारणीभूत जीवाणु
तपेदिक /यक्ष्मा (Tuberculosis) Mycobacterium tuberculosis
आंत्र ज्वर (Typhoid) Salmonella typhi
हैजा (Cholera) Vibrio cholerae
प्लेग (Plague) Yersinia pestis
डिप्थीरिया Corynebacterium diphtheriae
पर्टुसिस (काली खांसी) Pertussis (Whooping Cough) Bordetella pertussis
Tetanus Clostridium tetani
कुष्ठ रोग (हैन्सन रोग) (Leprosy (Hansen’s Disease)) Mycobacterium leprae
न्यूमोनिया Streptococcus pneumoniae, others
सिफलिस/ उपदंश (Syphilis) Treponema pallidum
Anthrax Bacillus anthracis
ब्रूसिलोसिस (Brucellosis) Brucella species

 

III. प्रोटोज़ोअन रोग (Protozoan Diseases)

रोग /बीमारी कारणकारी प्रोटोज़ोआ
मलेरिया Plasmodium spp. (P. falciparum, etc.)
amoebiasis Entamoeba histolytica
निद्रा रोग (Sleeping Sickness) Trypanosoma brucei
चागास रोग (Chagas Disease) Trypanosoma cruzi
गियार्डियासिस (Giardiasis) Giardia lamblia
Leishmaniasis (काला अजार) Leishmania donovani
टोक्सोप्लाज़मोसिज़ (Toxoplasmosis) Toxoplasma gondii

 

  1. फफूंद जनित रोग (Fungal Diseases)
रोग /बीमारी कारणकारी फफूंद /कवक
दाद (Ringworm) Trichophyton spp., others
एथलीट फुट Tinea pedis
Candidiasis (Thrush) Candida albicans
एस्परगिलोसिस (Aspergillosis) Aspergillus spp.
हिस्टोप्लाज़मोसिस (Histoplasmosis) Histoplasma capsulatum

 

  1. प्रियन रोग/ Prion Diseases (दुर्लभ, अपक्षयी)
बीमारी कारक एजेंट
क्रेउत्ज़फेल्ड-जैकब रोग (Creutzfeldt–Jakob Disease (CJD) Prions (गलत तरीके से मुड़े हुए प्रोटीन)
पागल गाय रोग (Mad Cow Disease (BSE) Prions

स्रोत: PIB


जीडीपी आधार वर्ष और कार्यप्रणाली में संशोधन (Revision of GDP Base Year and Methodology)

श्रेणी: अंतर्राष्ट्रीय

संदर्भ: जीडीपी आधार वर्ष और कार्यप्रणाली में संशोधन

आधार वर्ष को संशोधित करने का उद्देश्य:

यह काम किस प्रकार करता है:

भारत के लिए 2026 का संशोधन क्यों महत्वपूर्ण है

मुख्य निहितार्थ:

Learning Corner:

जीडीपी से संबंधित महत्वपूर्ण शब्द

  1. सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product (GDP)

परिभाषा:
जीडीपी एक विशिष्ट समय अवधि (आमतौर पर एक वर्ष) के दौरान किसी देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य है।

इसमें शामिल हैं:

प्रकार:

  1. सकल राष्ट्रीय उत्पाद (Gross National Product (GNP)

परिभाषा: जीएनपी किसी देश के निवासियों (नागरिकों) द्वारा एक निश्चित अवधि में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य है , चाहे वे कहीं भी रहते हों ।

सूत्र:
जीएनपी = जीडीपी + विदेश से शुद्ध कारक आय (Net Factor Income from Abroad (NFIA)

NFIA = विदेशों में भारतीयों द्वारा अर्जित आय – भारत में विदेशियों द्वारा अर्जित आय

  1. शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (Net National Product (NNP)

परिभाषा: एनएनपी मूल्यह्रास (स्थायी पूंजी की खपत) घटाने के बाद जीएनपी है। यह उपभोग या बचत के लिए उपलब्ध शुद्ध उत्पादन को दर्शाता है।

सूत्र:
एनएनपी = जीएनपी – मूल्यह्रास

दो तरीके:

  1. राष्ट्रीय आय (National Income (NI)

परिभाषा:
राष्ट्रीय आय एक वर्ष के दौरान किसी देश के नागरिकों द्वारा उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का शुद्ध मौद्रिक मूल्य है, जिसे कारक लागत पर मापा जाता है।

सूत्र:
राष्ट्रीय आय = कारक लागत (Factor Cost) पर एनएनपी

इसमें शामिल हैं:

स्रोत: THE INDIAN EXPRESS


फाल्कन 2000 (Falcon 2000)

श्रेणी: अंतर्राष्ट्रीय

संदर्भ : फ्रांसीसी एयरोस्पेस फर्म डसॉल्ट एविएशन और रिलायंस एयरोस्ट्रक्चर लिमिटेड ने भारत के नागपुर में फाल्कन 2000 बिजनेस जेट के निर्माण के लिए एक संयुक्त उद्यम की घोषणा की है।

मुख्य तथ्य

महत्व

बाजार और रणनीतिक प्रभाव

निष्कर्ष

यह संयुक्त उद्यम भारत को वैश्विक एयरोस्पेस मानचित्र पर स्थान दिलाता है, जो उच्च-स्तरीय नागरिक विमान बनाने की इसकी क्षमता का संकेत देता है। यह औद्योगिक आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करता है और देश को बिजनेस जेट बाजार में एक प्रतिस्पर्धी अभिकर्ता के रूप में स्थापित करता है।

Learning Corner:

भारत में विमान निर्माण

‘मेक इन इंडिया’ और ‘ आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत स्वदेशी उत्पादन के लिए सरकार के प्रयासों से प्रेरित है।

प्रमुख अभिकर्ता और संस्थान

इकाई भूमिका/योगदान
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) भारत की सबसे बड़ी एयरोस्पेस निर्माता कंपनी; तेजस, ध्रुव हेलीकॉप्टर जैसे सैन्य विमान बनाती है
डीआरडीओ विमान प्रणालियों का डिजाइन और विकास (जैसे, AEW&C, रुस्तम UAV)
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स बोइंग, एयरबस और लॉकहीड मार्टिन के साथ सहयोग करता है; ढांचा (fuselage) और अन्य घटकों का निर्माण करता है
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) विमानों के लिए एवियोनिक्स और रडार की आपूर्ति करता है
डसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस नागपुर में फाल्कन बिजनेस जेट का उत्पादन करने के लिए संयुक्त उद्यम (2028 तक फाल्कन 2000 असेंबली)

 

प्रमुख स्वदेशी विमान परियोजनाएँ

विमान का नाम प्रकार विवरण
तेजस (LCA) फ़ाइटर जेट एचएएल और डीआरडीओ द्वारा विकसित स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान
HTT-40 प्रशिक्षक विमान भारतीय वायु सेना के लिए बुनियादी प्रशिक्षक विमान
Saras Mk II परिवहन विमान एनएएल द्वारा विकसित किया जा रहा स्वदेशी हल्का परिवहन विमान 
TAPAS-BH 201 यूएवी डीआरडीओ द्वारा विकसित मध्यम ऊंचाई वाला दीर्घकालीन-स्थायी ड्रोन
AMCA लड़ाकू विमान (आगामी) 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ विमान का विकास जारी

 

नागरिक विमान निर्माण

सरकारी सहायता

स्रोत : THE INDIAN EXPRESS  


ऑपरेशन सिंधु (Operation Sindhu)

श्रेणी: अर्थशास्त्र

प्रसंग : ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष के बाद भारत ने ईरान से अपने नागरिकों को निकालने के लिए ऑपरेशन सिंधु शुरू किया है।

संदर्भ का दृष्टिकोण

मुख्य तथ्य:

महत्व:

ऑपरेशन सिंधु विदेशों में अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता तथा अंतर्राष्ट्रीय संकटों पर त्वरित प्रतिक्रिया देने की उसकी क्षमता को रेखांकित करता है।

Learning Corner:

भारत का विदेशी परिचालन

वर्ष ऑपरेशन का नाम देश / क्षेत्र उद्देश्य / संकट विवरण
2025 ऑपरेशन सिंधु ईरान वाया आर्मेनिया ईरान-इज़रायल संघर्ष बढ़ने के बीच निकासी जारी
2023 ऑपरेशन अजय इजराइल इजराइल-हमास संघर्ष के दौरान निकासी
2022 ऑपरेशन गंगा यूक्रेन और पड़ोसी रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान छात्रों का निष्कासन
2021 ऑपरेशन देवी शक्ति अफ़ग़ानिस्तान तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद निकासी
2020–21 वंदे भारत मिशन वैश्विक (कोविड-19) कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान बड़े पैमाने पर स्वदेश वापसी

स्रोत : THE HINDU

 


आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ (Invasive alien species)

श्रेणी: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

परिभाषा:
आक्रामक विदेशी प्रजातियां (Invasive Alien Species (IAS) गैर-देशी जीव हैं जिन्हें जानबूझकर या गलती से पारिस्थितिकी तंत्र में प्रस्तुत/ समाहित किया जाता है, जहां वे स्थापित होते हैं, फैलते हैं, और देशी जैव विविधता, पारिस्थितिकी तंत्र, कृषि, अर्थव्यवस्था या मानव स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

प्रमुख बिंदु:

निष्कर्ष में, जबकि व्यापार शुल्क कुछ वस्तुओं को रोक सकते हैं, वे अनजाने में आक्रामक प्रजातियों के लिए दरवाजे खोल सकते हैं, खासकर जब क्वारंटाइन और विनियामक प्रणालियाँ अपर्याप्त हों। वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती भूमिका के लिए अपने मूल पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए तत्काल और सक्रिय जैव सुरक्षा सुधारों की आवश्यकता है।

Learning Corner:

भारत में प्रमुख आक्रामक प्रजातियाँ

प्रजातियाँ मूल क्षेत्र /देश  प्रभाव
लॅन्टाना कैमरा (Lantana camara) उष्णकटिबंधीय अमेरिका देशी वनस्पतियों का विस्थापन, चरागाह भूमि पर प्रभाव
पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस (Parthenium hysterophorus) सेंट्रल अमेरिका एलर्जी पैदा करने वाला; फसल उत्पादकता और जैव विविधता को कम करता है
इचोर्निया क्रैसिपेस (जलकुंभी) (Eichhornia crassipes (Water

hyacinth))

दक्षिण अमेरिका जल निकायों को अवरुद्ध करता है, ऑक्सीजन को कम करता है, मत्स्य पालन को प्रभावित करता है
प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा (Prosopis juliflora) सेंट्रल अमेरिका भूजल का ह्रास; देशी झाड़ियाँ विस्थापित
पेनिसेटम सेटेशियम (फव्वारा घास) (Pennisetum setaceum

(Fountain grass))

अफ्रीका शुष्क भूमि पर आक्रमण; आग का खतरा बढ़ता है
Giant African Snail (Achatina

fulica)

पूर्वी अफ़्रीका फसलों को नुकसान पहुंचाता है, तेजी से फैलता है, उन्मूलन कठिन है
तिलापिया (Tilapia (Oreochromis spp.) अफ्रीका देशी मछली प्रजातियों को पछाड़ता है, जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को बदलता है
गम्बूसिया एफिनिस/ Gambusia affinis उत्तरी अमेरिका मच्छर नियंत्रण के लिए शुरू किया गया; देशी मछलियों को नुकसान पहुंचाता है

स्रोत: THE HINDU


(MAINS Focus)


भारत में विदेशी शैक्षणिक संस्थान (Foreign Campuses in India) (जीएस पेपर II - शासन)

परिचय (संदर्भ)

यूजीसी के 2023 के विनियमों ने भारत में विदेशी विश्वविद्यालय शाखा परिसरों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं । तब से, डेकिन विश्वविद्यालय, वॉलोन्गॉन्ग विश्वविद्यालय और साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय सहित कई विदेशी संस्थानों ने परिचालन शुरू कर दिया है। यॉर्क विश्वविद्यालय और इलिनोइस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी जैसे कई संस्थानों को भारत में प्रवेश के लिए आशय पत्र प्राप्त हुए हैं। जबकि यह भारत के अंतर्राष्ट्रीयकरण प्रयासों में एक बड़ा सुधार है, कई चुनौतियाँ उभर रही हैं।

प्रमुख मुद्दे और चुनौतियाँ:

भारत में पहले से ही भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) और भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) जैसे प्रसिद्ध सार्वजनिक संस्थान हैं, जो सक्रिय रूप से अपनी वैश्विक भागीदारी और शोध क्षमताओं का विस्तार कर रहे हैं। क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के साथ IIT दिल्ली और मोनाश विश्वविद्यालय के साथ IIT बॉम्बे जैसे उल्लेखनीय सहयोग ने अंतर्राष्ट्रीय शोध साझेदारी के लिए मजबूत मिसाल कायम की है। इसके अलावा, भारत में बढ़ती संख्या में कुलीन और अर्ध-कुलीन निजी विश्वविद्यालय अब विदेशी संस्थानों के सहयोग से संयुक्त और दोहरी डिग्री कार्यक्रम प्रदान करते हैं । इस गतिशील वातावरण में, विदेशी शाखा परिसर केवल अपने ब्रांड की ताकत पर निर्भर नहीं रह सकते।

इनमें से कुछ चुनौतियाँ इस प्रकार हैं:

1. प्रतिस्पर्धी उच्च शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को संचालित करना

2. वैश्विक प्रतिष्ठा का अभाव (Lack of Global Prestige)

3. संकीर्ण, बाजार-संचालित पाठ्यक्रम पेशकश (Narrow, Market-Driven Course Offerings)

4. व्यापक शैक्षणिक पहचान का अभाव (Absence of Comprehensive Academic Identity)

5. अनुसंधान और बहुविषयक फोकस का अभाव (Lack of Research and Multidisciplinary Focus)

6. समय से पहले लॉन्च और पारदर्शिता का अभाव (Premature Launch and Lack of Transparency)

7. अपर्याप्त कैम्पस अनुभव

आगे की राह:

निष्कर्ष

भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों की शाखा परिसरों की स्थापना उच्च शिक्षा परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। हालाँकि, अगर इन उपक्रमों को जल्दबाजी में या खराब तरीके से प्रबंधित किया जाता है, तो वे जोखिम का कारण बन सकते हैं – जहां अल्पकालिक पहल जो विश्वास को खत्म करती हैं, ब्रांड मूल्य को कम करती हैं, और सार्थक अंतर्राष्ट्रीयकरण की ओर व्यापक गति को रोकती हैं।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

भारत के उच्च शिक्षा परिदृश्य में विदेशी विश्वविद्यालय परिसरों के महत्व पर चर्चा करें। उनसे जुड़ी प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं, और सार्थक शैक्षणिक जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए उनका समाधान कैसे किया जा सकता है? ( 250 शब्द, 15 अंक)


जीडीपी आधार वर्ष संशोधन (GDP Base Year revision) (जीएस पेपर III – अर्थव्यवस्था)

परिचय (संदर्भ)

भारत अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की गणना के लिए आधार वर्ष को 2011-12 से संशोधित कर 2022-23 करेगा। संशोधित डेटा श्रृंखला 27 फरवरी, 2026 को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी की जाएगी। यह भारतीय अर्थव्यवस्था की उभरती संरचना को बेहतर ढंग से समझने के लिए एक नियमित और आवश्यक सांख्यिकीय अभ्यास का हिस्सा है।

जीडीपी क्या है?

भारत में जीडीपी गणना पद्धतियाँ:

  1. उत्पादन विधि (Production Method): प्राथमिक (कृषि), द्वितीयक (उद्योग) और तृतीयक (सेवा) क्षेत्रों में जोड़े गए मूल्य का अनुमान लगाती है।
  2. आय विधि (Income Method): उत्पादन के कारकों द्वारा अर्जित आय का योग – मजदूरी, किराया, ब्याज और मुनाफा।
  3. व्यय विधि (Expenditure Method): अंतिम वस्तुओं और सेवाओं पर कुल व्यय को मापता है – उपभोग, निवेश, सरकारी व्यय और शुद्ध निर्यात।

सांख्यिकी मंत्रालय के तहत MoSPI , उत्पादन और व्यय दृष्टिकोण के मिश्रण का उपयोग करता है और उद्योगों के वार्षिक सर्वेक्षण, MCA-21 कॉर्पोरेट फाइलिंग, NSSO सर्वेक्षण और सरकारी विभागों के प्रशासनिक डेटा जैसे स्रोतों से डेटा को शामिल करता है।

सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) किसी देश की आर्थिक सेहत और विकास का आकलन करने के लिए सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला संकेतक है। इसका महत्व नीति निर्माण, निवेश निर्णयों और सार्वजनिक कल्याण तक फैला हुआ है।

जीडीपी का महत्व

जीडीपी आधार वर्ष क्या है?

भारत में जीडीपी आधार वर्ष संशोधन की ऐतिहासिक समयरेखा:

  1. 1948–49 ➝ 1960–61 (1967 में)
  2. 1960–61 ➝ 1970–71 (1978 में)
  3. 1970–71 ➝ 1980–81 (1988 में)
  4. 1980–81 ➝ 1993–94 (1999 में)
  5. 1993–94 ➝ 1999–2000 (2006 में)
  6. 1999–2000 ➝ 2004–05 (2010 में)
  7. 2004–05 ➝ 2011–12 (2015 में)
  8. 2011–12 ➝ 2022–23 (2026 में – आगामी)

आधार वर्ष संशोधन के पीछे तर्क

2011-12 के पांच साल बाद भी आधार वर्ष क्यों नहीं बदला गया?

जीडीपी संशोधन के साथ-साथ अन्य प्रमुख अपडेट

2026 के संशोधन का महत्व

Value addition: शब्दावली

आगे की राह

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

भारत में जीडीपी आधार वर्ष को नियमित रूप से अपडेट करने के औचित्य पर चर्चा करें। यह आर्थिक नीति निर्माण और अंतर्राष्ट्रीय धारणा को कैसे प्रभावित करता है? (250 शब्द, 15 अंक)

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