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(PRELIMS MAINS Focus)


 

CAR T-कोशिकाएं (CAR T-Cells)

श्रेणी: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

प्रसंग : सीएआर टी-कोशिकाएं बनाने की इन विवो (In Vivo) तकनीक कैंसर देखभाल में बदलाव ला सकती है

संदर्भ का दृष्टिकोण:

अवलोकन

प्रमुख नवाचार

लाभ

प्रीक्लिनिकल सफलता (Preclinical Success)

जोखिम और सुरक्षा (Risks & Safety)

भारत के लिए निहितार्थ

Learning Corner:

सीएआर-टी थेरेपी (CAR-T Therapy (Chimeric Antigen Receptor T-cell Therapy)

सीएआर-टी थेरेपी एक प्रकार की इम्यूनोथेरेपी है जो कैंसर से लड़ने के लिए विशेष रूप से संशोधित टी-कोशिकाओं (एक प्रकार की श्वेत रक्त कोशिका) का उपयोग करती है।

CAR-T क्या है?

यह काम किस प्रकार करता है:

  1. टी-कोशिका संग्रहण (T-cell Collection): टी-कोशिकाएं रोगी के रक्त से एकत्रित की जाती हैं।
  2. आनुवंशिक संशोधन (Genetic Modification): प्रयोगशाला में, इन टी-कोशिकाओं को उनकी सतह पर सीएआर उत्पन्न करने के लिए संशोधित किया जाता है।
  3. कोशिका गुणन (Cell Multiplication): संशोधित कोशिकाओं का गुणन बड़ी संख्या में होता है।
  4. पुनःप्रवेश (Reinfusion): इन इंजीनियर्ड सीएआर-टी कोशिकाओं को रोगी में पुनः प्रविष्ट कराया जाता है।
  5. कैंसर पर हमला (Attack Cancer): CAR-T कोशिकाएं लक्ष्य प्रतिजन ले जाने वाली कैंसर कोशिकाओं की पहचान करती हैं और उन्हें मार देती हैं।

अनुप्रयोग:

भारत में CAR-T:

चुनौतियाँ:

स्रोत: THE HINDU


आपातकाल की घोषणा के 50 वर्ष पूर्ण

श्रेणी: राजनीति

संदर्भ: भारत में आपातकाल 25 जून 1975 को घोषित किया गया और 21 मार्च 1977 तक चला

राष्ट्रीय आपातकाल (भारतीय संविधान का अनुच्छेद 352)

राष्ट्रीय आपातकाल अनुच्छेद 352 के अंतर्गत एक संवैधानिक प्रावधान है जो केंद्र सरकार को राष्ट्र की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे की स्थिति में व्यापक शक्तियां ग्रहण करने की अनुमति देता है।

उद्घोषणा के आधार:

भारत के राष्ट्रपति द्वारा निम्नलिखित आधारों पर राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की जा सकती है :

  1. युद्ध
  2. बाह्य आक्रामकता
  3. सशस्त्र विद्रोह (44वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया; “आंतरिक अशांति” शब्द प्रतिस्थापित)

प्रक्रिया:

राष्ट्रीय आपातकाल के प्रभाव:

  1. संघवाद कमजोर हुआ : केंद्र किसी भी मामले पर राज्यों को निर्देश दे सकता है।
  2. मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 19) : युद्ध/बाह्य आक्रमण के कारण आपातकाल के दौरान निलंबित किया जा सकता है (सशस्त्र विद्रोह के कारण नहीं)।
  3. अनुच्छेद 358 : अनुच्छेद 19 को स्वतः निलंबित कर देता है।
  4. अनुच्छेद 359 : अन्य अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित करने की अनुमति देता है (44वें संशोधन के बाद अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर)।
  5. लोकसभा का कार्यकाल : एक बार में 1 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है (आपातकाल समाप्त होने के बाद अधिकतम 6 महीने तक)।

भारतीय इतिहास के उदाहरण:

  1. 1962 – भारत-चीन युद्ध (बाहरी आक्रमण)
  2. 1971 – भारत-पाक युद्ध (युद्ध)
  3. 1975–1977 – इंदिरा गांधी द्वारा घोषित (आंतरिक अशांति); सबसे विवादास्पद

संवैधानिक सुरक्षा उपाय (44वां संशोधन, 1978):

Learning Corner:

भारतीय संविधान में आपातकाल के प्रकार

राष्ट्रपति शासन (राज्य आपातकाल) – अनुच्छेद 356

आधार:

प्रमुख विशेषताऐं :

वित्तीय आपातकाल – अनुच्छेद 360

आधार:

प्रमुख विशेषताऐं :

तुलना तालिका

प्रकार अनुच्छेद  आधार अनुमोदन आवश्यक इस्तेमाल किया गया?
राष्ट्रीय आपातकाल 352 युद्ध, बाह्य आक्रमण, सशस्त्र विद्रोह हाँ (दोनों सदन) 3 बार
राष्ट्रपति शासन 356 राज्य मशीनरी की विफलता हाँ 100+ बार
वित्तीय आपातकाल 360 वित्तीय अस्थिरता हाँ कभी नहीं

स्रोत: THE INDIAN EXPRESS 


वैश्विक एसडीजी रैंकिंग (Global SDG Rankings)

श्रेणी: अंतर्राष्ट्रीय

प्रसंग: भारत ने पहली बार संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) रैंकिंग में शीर्ष 100 में प्रवेश किया है, जिससे 2025 में 193 देशों में से 99वां स्थान प्राप्त हुआ है ।

मुख्य तथ्य:

सुधार के कारण:

वैश्विक संदर्भ:

Learning Corner:

सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी)

सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों द्वारा 2015 में सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा के हिस्से के रूप में अपनाई गई कार्रवाई के लिए एक सार्वभौमिक आह्वान है। 2030 तक गरीबी को समाप्त करने, ग्रह की रक्षा करने और सभी के लिए शांति और समृद्धि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 17 लक्ष्य और 169 उप-लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

प्रमुख विशेषताऐं:

17 एसडीजी लक्ष्यों की सूची:

  1. शून्य गरीबी 
  2. शून्य भूखमरी
  3. अच्छा स्वास्थ्य और खुशहाली
  4. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
  5. लैंगिक समानता
  6. स्वच्छ जल एवं स्वच्छता
  7. सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा
  8. अच्छा काम और आर्थिक विकास
  9. उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढांचा
  10. असमानताओं में कमी
  11. सतत शहर और समुदाय
  12. जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन
  13. जलवायु कार्रवाई
  14. पानी के नीचे जीवन
  15. भूमि पर जीवन
  16. शांति, न्याय और मजबूत संस्थाएँ
  17. लक्ष्यों के लिए साझेदारी

भारत में सतत विकास लक्ष्य:

स्रोत : THE HINDU


कर्नाटक मंदिर में 15वीं सदी का मूर्तिकला दीपक मिला (15th-Century Sculptural Lamp Found in Karnataka Temple)

श्रेणी: इतिहास

संदर्भ: कर्नाटक के उडुपी जिले के पेरदुर में अनंतपद्मनाभ मंदिर में 15वीं शताब्दी का एक दुर्लभ मूर्तिकला दीपक खोजा गया है।

यह दीपक अपनी जटिल कलाकृति के कारण विशिष्ट है, जिसमें शैव और वैष्णव प्रतिमाओं का मिश्रण है, तथा यह मध्ययुगीन कर्नाटक की समन्वित धार्मिक परंपराओं को दर्शाता है।

मुख्य तथ्य:

यह खोज क्षेत्र की मंदिर विरासत और धार्मिक कला के बारे में हमारी समझ को समृद्ध करती है, तथा उडुपी के दीर्घकालिक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करती है।

Learning Corner:

भारत में 15वीं सदी की वास्तुकला

भारत में 15वीं शताब्दी क्षेत्रीय साम्राज्यों का काल था, जिसमें स्वदेशी शैलियों और उभरते इस्लामी प्रभावों का समृद्ध मिश्रण था। इस युग के दौरान वास्तुकला के विकास ने धार्मिक भक्ति और राजनीतिक शक्ति दोनों को प्रतिबिंबित किया।

15वीं शताब्दी की प्रमुख स्थापत्य शैलियाँ:

विजयनगर वास्तुकला (दक्षिण भारत)

इंडो-इस्लामिक वास्तुकला (उत्तर और मध्य भारत)

राजपूत वास्तुकला

समन्वयात्मक धार्मिक कला

सामग्री और तकनीक

स्रोत : THE HINDU


नारायण गुरु-गांधी वार्तालाप (Narayana Guru–Gandhi Conversation)

श्रेणी: इतिहास

संदर्भ: 24 जून 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में श्री नारायण गुरु और महात्मा गांधी के बीच ऐतिहासिक मुलाकात के शताब्दी समारोह को संबोधित किया।

मुख्य तथ्य:

Learning Corner:

श्री नारायण गुरु (1855-1928)

श्री नारायण गुरु केरल के एक समाज सुधारक, दार्शनिक और आध्यात्मिक नेता थे, जो जाति व्यवस्था के खिलाफ अपनी लड़ाई और समानता और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते थे ।

प्रमुख योगदान:

महात्मा गांधी (1869-1948)

प्रमुख योगदान:

ऐतिहासिक संबंध:

महत्व:

स्रोत: PIB


(MAINS Focus)


आपातकाल और उसके प्रभाव (जीएस पेपर I – स्वतंत्रता के बाद का भारत)

परिचय (संदर्भ)

25 जून, 2025 को आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ है, जो भारतीय लोकतंत्र में एक निर्णायक और विवादास्पद अवधि है। 25 जून, 1975 से 21 मार्च, 1977 तक 21 महीने की अवधि में इंदिरा गांधी की सरकार ने नागरिक स्वतंत्रता को निलंबित कर दिया, प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया, सामूहिक गिरफ्तारियाँ कीं, चुनाव रद्द किए और हुक्मनामा चलाकर शासन किया था।

ऐतिहासिक एवं राजनीतिक पृष्ठभूमि

संवैधानिक उपकरण और डिक्री (आदेश) द्वारा शासन

आपातकाल की घोषणा संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत की गई थी , जिसका कारण “आंतरिक अशांति” बताया गया था। इस अनुच्छेद ने केंद्र सरकार को संघीय मानदंडों को दरकिनार करने और लोकतांत्रिक अधिकारों को निलंबित करने के लिए व्यापक अधिकार दिए थे।

अनुच्छेद 352 के बारे में

मौलिक अधिकारों और प्रेस पर हमला

आपातकाल के दौरान नागरिक स्वतंत्रता पूरी तरह से निलंबित कर दी गई थी:

संजय गांधी का पांच सूत्री कार्यक्रम और राज्य की ज्यादतियां

इंदिरा के पुत्र संजय गांधी आपातकाल के दौरान वास्तविक नीति निर्माता के रूप में उभरे, तथा उन्होंने एक विवादास्पद पांच सूत्री कार्यक्रम का नेतृत्व किया , जिसमें शामिल थे:

उनके कार्यक्रम के कारण , खासकर उत्तर भारत में जबरन नसबंदी अभियान चलाए गए। कई मामलों में, नसबंदी प्रमाणपत्र के बिना पुरुषों को राशन, वेतन या ड्राइविंग लाइसेंस देने से मना कर दिया गया। दिल्ली में कुख्यात तुर्कमान गेट की घटना और अक्टूबर 1976 में मुजफ्फरनगर पुलिस फायरिंग (जिसमें 50 से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई) राज्य की क्रूरता के प्रतीक बन गए।

आपातकाल की समाप्ति और राजनीतिक परिणाम

भारतीय लोकतंत्र पर प्रभाव

निष्कर्ष​

1975-77 का आपातकाल इस बात की एक शक्तिशाली याद दिलाता है कि मजबूत जाँच और संतुलन के अभाव में लोकतांत्रिक संस्थाएँ कितनी कमज़ोर हो सकती हैं। इसने केंद्रित कार्यकारी शक्ति के खतरों, नागरिक स्वतंत्रता की भेद्यता और संवैधानिक लोकतंत्र में निरंतर सतर्कता की आवश्यकता को उजागर किया। चूँकि भारत उस महत्वपूर्ण मोड़ के 50 साल पूरे कर रहा है, इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्रता, जवाबदेही और संवैधानिक नैतिकता के मूल्यों को बनाए रखना महत्वपूर्ण है कि ऐसा प्रकरण कभी दोहराया न जाए।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

भारत के संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर 1975 के आपातकाल के संवैधानिक और राजनीतिक प्रभाव का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए । (250 शब्द, 15 अंक)


शहरी नौकरशाही में लैंगिक समानता की आवश्यकता (The need for gender equity in urban bureaucracy) (जीएस पेपर II - शासन)

परिचय (संदर्भ)

शहरी शासन प्रणालियों में लैंगिक समानता की कमी के बारे में चिंताएँ बढ़ रही हैं । जबकि जमीनी स्तर पर महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बेहतर हुआ है, शहरी प्रशासन में उनका नौकरशाही प्रतिनिधित्व अभी भी अनुपातहीन रूप से कम है , जो भारत के शहरी परिवर्तन की समावेशिता को कमज़ोर कर रहा है।

मुख्य डेटा:

संवैधानिक सुधार

प्रशासनिक असमानता :

मुद्दे और चुनौतियाँ

1. नौकरशाही में संरचनात्मक प्रतिनिधित्व की कमी
2. शहरी डिजाइन और महिलाओं की ज़रूरतों के बीच असंतुलन
3. लिंग-उत्तरदायी बजट की उपेक्षित क्षमता (Neglected Potential of Gender-Responsive Budgeting (GRB)

वैश्विक प्रथाएँ

Value addition: शब्दावलियाँ

आगे की राह

1. नौकरशाही और तकनीकी समावेशन
2. जीआरबी को संस्थागत बनाना
3. स्थानीय संस्थाओं को मजबूत करना
4. प्रतिनिधित्व से एजेंसी की ओर बदलाव

निष्कर्ष

भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की आकांक्षा रखता है, इसलिए इसके शहरों को आर्थिक विकास इंजन से भी बढ़कर बनना चाहिए। उन्हें समावेश और समानता के स्थान बनना चाहिए। नियोजन और कार्यान्वयन में लिंग को मुख्यधारा में शामिल किया जाना चाहिए। महिलाओं के लिए शहर बनाने के लिए, हमें महिलाओं के साथ शहर बनाने से शुरुआत करनी चाहिए।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

जबकि भारत ने स्थानीय राजनीति में लैंगिक प्रतिनिधित्व में उल्लेखनीय प्रगति की है, शहरी नौकरशाही में लैंगिक समानता की कमी समावेशी शासन को कमजोर करती है। समालोचनात्मक परीक्षण करें। (250 शब्द, 15 अंक)

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