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(PRELIMS  Focus)


नोबेल शांति पुरस्कार 2025 (Nobel Peace Prize)

श्रेणी: विविध

संदर्भ:

नोबेल शांति पुरस्कार 2025 के बारे में:

नोबेल शांति पुरस्कार के बारे में:

स्रोत:


जनगणना 2027 (Census)

श्रेणी: राजव्यवस्था और शासन

संदर्भ:

जनगणना के बारे में:

जनगणना 2027 के बारे में:

स्रोत:


सावलकोट जलविद्युत परियोजना (Sawalkote Hydroelectric Project)

श्रेणी: भूगोल

संदर्भ:

सावलकोट जलविद्युत परियोजना के बारे में:

चेनाब नदी के बारे में:

स्रोत:


दुर्लभ मृदा तत्व (Rare Earth Elements)

श्रेणी: अर्थव्यवस्था

संदर्भ:

दुर्लभ मृदा तत्वों के बारे में:

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सक्षम प्रणाली (SAKSHAM System)

श्रेणी: रक्षा और सुरक्षा

संदर्भ:

सक्षम प्रणाली के बारे में:

स्रोत:


(MAINS Focus)


वास्तविक आवश्यकता एक समग्र जनसांख्यिकीय मिशन है (The Real Need is a Holistic Demographic Mission)

(जीएस पेपर 1: भारतीय समाज - जनसंख्या और संबंधित मुद्दे)

संदर्भ (परिचय)

भारत द्वारा अनिर्दिष्ट आप्रवासन पर केंद्रित एक जनसांख्यिकीय मिशन की घोषणा ने जनसंख्या प्रशासन पर बहस को फिर से छेड़ दिया है। भारत के जनसांख्यिकीय चौराहे - युवा जनसंख्या, प्रवासन परिवर्तन और वृद्धावस्था प्रवृत्तियों - को देखते हुए, जनसंख्या, विकास और मानव क्षमता लक्ष्यों को संरेखित करने के लिए एक समग्र जनसांख्यिकीय मिशन अत्यंत महत्वपूर्ण है।

एक व्यापक जनसांख्यिकीय मिशन की आवश्यकता क्यों है

आलोचनाएँ / कमियाँ

सुधार और आगे की राह 

निष्कर्ष

भारत का जनसांख्यिकीय लाभ तभी कायम रहेगा जब वह संख्याओं को क्षमताओं में बदलेगा। एक समग्र जनसांख्यिकीय मिशन - युवा क्षमता, प्रवासी समावेशन और वृद्धावस्था सुरक्षा को एकीकृत करते हुए - एक मानवीय जनसांख्यिकीय परिवर्तन के लिए संतुलित, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार जनसंख्या शासन सुनिश्चित कर सकता है।

मुख्य परीक्षा प्रश्न:

प्रश्न: भारत का जनसांख्यिकीय लाभ केवल संख्या में ही नहीं, बल्कि क्षमताओं के पोषण और समावेशन में भी निहित है। एक समग्र जनसांख्यिकीय मिशन की आवश्यकता का परीक्षण कीजिए जो युवा क्षमता और वृद्धावस्था की तैयारी को एकीकृत करे। (15 अंक, 250 शब्द)

स्रोत: https://www.thehindu.com/opinion/op-ed/the-real-need-is-a-holistic-demographicmission/article70149226.ece#:~:text=The%20agenda%20of%20a%20demography,response%20t o %20the%20migration%20transition .


जानलेवा कफ सिरप त्रासदी: भारत की औषधि नियामक प्रणाली के लिए सबक

(जीएस पेपर 2: स्वास्थ्य, सरकारी नीतियों और हस्तक्षेपों से संबंधित मुद्दे)

संदर्भ (परिचय)

मध्य प्रदेश में डायथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) से दूषित कफ सिरप के सेवन से 24 बच्चों की मौत भारत के दवा विनियमन, निरीक्षण और जवाबदेही तंत्र की गहरी खामियों को उजागर करती है। यह त्रासदी दवा सुरक्षा, गुणवत्ता और निगरानी सुनिश्चित करने में व्यवस्थागत विफलताओं को रेखांकित करती है।

प्रणालीगत चूक और मूल कारण

आलोचनाएँ और संरचनात्मक कमज़ोरियाँ

सुधार और आगे की राह 

निष्कर्ष:
मध्य प्रदेश की त्रासदी कोई अकेली विफलता नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित विफलता है। भारत के औषधि सुरक्षा ढांचे को खंडित निगरानी से हटाकर एक एकल, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम नियामक तंत्र की ओर मोड़ना होगा जो यह सुनिश्चित करे कि बेची जाने वाली प्रत्येक दवा वास्तव में सुरक्षित और जीवन रक्षक हो ।

मुख्य परीक्षा प्रश्न:

प्रश्न: भारत में औषधि संदूषण की बार-बार होने वाली घटनाएँ औषधि विनियमन और प्रवर्तन में गहरी खामियों की ओर इशारा करती हैं। भारत के औषधि नियामक ढाँचे की संरचनात्मक कमज़ोरियों का विश्लेषण कीजिए और जनता का विश्वास और सुरक्षा बहाल करने के लिए सुधार सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द)

स्रोत: https://www.thehindu.com/sci-tech/health/killer-cough-syrup/article70149440.ece

 

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