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(PRELIMS  Focus)


गिनी सूचकांक (Gini Index)

श्रेणी: अर्थशास्त्र

प्रसंग:  गिनी सूचकांक ने भारत को विश्व के अधिक समान समाजों में स्थान दिया है

भारत में असमानता के रूप:

  1. धन असमानता:
  1. लैंगिक असमानता:
  1. डिजिटल असमानता:

Learning Corner:

गिनी गुणांक

गिनी गुणांक (या गिनी सूचकांक) किसी जनसंख्या के भीतर आय या धन असमानता का एक सांख्यिकीय माप है।

परिभाषा:

इसे कैसे मापा जाता है:

अनुप्रयोग:

सीमाएँ:

स्रोत: द हिंदू


आत्मनिर्भर तिलहन अभियान (Atmanirbhar Oil Seeds Abhiyan)

श्रेणी: राजनीति

संदर्भ: 2024-25 में शुरू किए गए इस मिशन का उद्देश्य 2030-31 तक भारत को तिलहन और खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है

मुख्य उद्देश्य:

कार्यान्वयन एवं लक्ष्य:

सहायता उपाय:

Learning Corner:

भारत में तिलहन उत्पादन:

प्रमुख सरकारी योजनाएँ:

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – तिलहन (NMEO-तिलहन) (2024-25 से 2030-31)

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM – तिलहन और पाम ऑयल)

मूल्य समर्थन योजना (PSS)

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)

स्रोत: पीआईबी


लद्दाख के गर्म झरने (Ladakh’s hot springs)

श्रेणी: भूगोल

संदर्भ: लद्दाख के गर्म झरने और जीवन की उत्पत्ति

वे क्यों महत्वपूर्ण हैं:

एक्सट्रीमोफाइल अंतर्दृष्टि (Extremophile Insights):

खगोलीय जैविक महत्व:

मुख्य निष्कर्ष:

Learning Corner:

हॉट स्प्रिंग्स/ गर्म झरने (Hot Springs):

गीजर:

भूवैज्ञानिक महत्व:

स्रोत: पीआईबी


प्रलय मिसाइल (Pralay missile)

श्रेणी: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

प्रसंग: प्रलय मिसाइल और उसके हालिया परीक्षण

मुख्य अंश:

तकनीकी सुविधा:

परिचालन उपयोगिता:

विकास एवं प्रेरण:

Learning Corner:

प्रलय के समकक्ष भारतीय मिसाइलें:

मिसाइल प्रमुख विशेषताऐं प्रलय से तुलना
प्रहार 150 किमी रेंज, ठोस ईंधन SRBM, अत्यधिक गतिशील कम दूरी और पेलोड; प्रलय बेहतर मार्गदर्शन और लंबी दूरी के साथ अधिक उन्नत है
शौर्य 700–1,900 किमी रेंज, हाइपरसोनिक, परमाणु-सक्षम लंबी दूरी और दोहरे उपयोग; शौर्य रणनीतिक है, जबकि प्रलय सामरिक और पारंपरिक है
ब्रह्मोस 290–450 किमी रेंज, सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, हवा/समुद्र/जमीन से प्रक्षेपित क्रूज मिसाइल (बैलिस्टिक नहीं); कम ऊंचाई, अधिक गतिशील; प्रलय बैलिस्टिक चाप पर अधिक तेज है

 

प्रलय के समान विदेशी मिसाइलें:

देश मिसाइल नोट्स
चीन DF-12 (CSS-X-15) सामरिक एसआरबीएम, ठोस ईंधन, प्रलय के समान रेंज और भूमिका
यूएसए ATACMS (आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम) अमेरिकी सेना द्वारा प्रयुक्त; ~300 किमी रेंज; गहन-सटीकता के लिए प्रयुक्त
रूस इस्कंदर-एम अत्यधिक सटीक, गतिशील एसआरबीएम; प्रलय जैसे युद्धक्षेत्र में प्रयुक्त
ईरान फतेह-110 कम दूरी की सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल; समान दूरी और पारंपरिक पेलोड

स्रोत : द हिंदू


काजीरंगा टाइगर रिजर्व (Kaziranga Tiger Reserve)

श्रेणी: पर्यावरण

संदर्भ: काजीरंगा टाइगर रिजर्व: भारत में तीसरा सबसे अधिक बाघ घनत्व (2024)

मुख्य डेटा:

शीर्ष तीन बाघ घनत्व (2024):

  1. बांदीपुर (कर्नाटक): 19.83 बाघ/100 वर्ग किमी
  2. कॉर्बेट (उत्तराखंड): 19.56 बाघ/100 वर्ग किमी
  3. काजीरंगा (असम): 18.65 बाघ/100 वर्ग किमी

यह क्यों मायने रखती है:

Learning Corner:

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान

अवलोकन:

मुख्य तथ्य:

विशेषता विवरण
प्रसिद्ध विश्व में एक सींग वाले गैंडे की सबसे बड़ी आबादी
अन्य जीव-जंतु बाघ, हाथी, जंगली भैंसे, दलदली हिरण, जलीय पक्षी
फ्लोरा/ पादप लंबी हाथी घास, दलदली भूमि, उष्णकटिबंधीय नम चौड़ी पत्ती वाले वन
नदी प्रणाली ब्रह्मपुत्र नदी के बाढ़ के मैदानों के किनारे स्थित है
बाघ अभयारण्य की स्थिति 2006 में बाघ अभयारण्य घोषित किया गया
बाघ घनत्व (2024) प्रति 100 वर्ग किमी में 18.65 बाघ – भारत में तीसरा सबसे अधिक (बांदीपुर और कॉर्बेट के बाद)
कवर किया गया क्षेत्र ~1,307 वर्ग किमी (नए जोड़े गए बिश्वनाथ वन्यजीव प्रभाग सहित)

पारिस्थितिक महत्व:

स्रोत: द हिंदू


(MAINS Focus)


बाल तस्करी (Child Trafficking) (GS पेपर I - भारतीय समाज, GS पेपर II - शासन)

परिचय (संदर्भ)

हाल ही में, बिहार में 271 से अधिक लड़कियों को बचाया गया, जिनमें से 153 को ऑर्केस्ट्रा में तस्करी के लिए भेजा गया था, तथा शेष 118 को देह व्यापार में धकेल दिया गया था।

पटना उच्च न्यायालय ने इस मुद्दे का संज्ञान लिया और बिहार सरकार को ऐसे ऑर्केस्ट्रा में नाबालिगों की नियुक्ति पर प्रतिबंध लगाने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

यह घटना गरीबी, विनियमन की कमी और सामाजिक-सांस्कृतिक शोषण से प्रेरित प्रणालीगत बाल तस्करी पर प्रकाश डालती है।

बाल तस्करी क्या है?

संयुक्त राष्ट्र पालेर्मो प्रोटोकॉल के अनुसार, बाल तस्करी में शोषण के लिए बच्चों की भर्ती, परिवहन, स्थानांतरण, आश्रय या प्राप्ति शामिल है , जिसमें जबरन श्रम, यौन शोषण और दासता शामिल है।

बाल तस्करी के सामान्य रूप

सुभेद्य बच्चों को कई प्रकार के शोषण का सामना करना पड़ सकता है, जिनमें शामिल हैं:

कभी-कभी बाल तस्करी के शिकार एक साथ कई तरह के शोषण का शिकार होते हैं। उदाहरण के लिए, सड़कों पर भीख मांगने वाले बच्चे का यौन शोषण भी हो सकता है।

डेटा:

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच वर्षों के दौरान बचाए गए पीड़ितों (18 वर्ष से कम) की संख्या नीचे दी गई है:

क्र.सं. वर्ष बचाए गए पीड़ित (18 वर्ष से कम)
1 2018 2484
2 2019 2746
3 2020 2151
4 2021 2691
5 2022 3098

कई मामले पुलिस स्टेशन तक नहीं पहुंचते क्योंकि या तो परिवार इसमें शामिल होते हैं या फिर बोलने से डरते हैं

बच्चे शोषण के प्रति संवेदनशील कैसे हो जाते हैं?

बिहार तस्करी का गढ़ क्यों बन गया है?

विनियमन और निरीक्षण का अभाव

भूगोल

सांस्कृतिक आकांक्षाओं का शोषण

‘ऑर्केस्ट्रा बेल्ट’ की उपस्थिति

बाल तस्करी पीड़ितों और समाज को किस प्रकार प्रभावित करती है?

इस अपराध के बच्चों के शारीरिक, संज्ञानात्मक और सामाजिक-भावनात्मक विकास पर विनाशकारी परिणाम होते हैं।

बाल तस्करी के खिलाफ कानून और मुद्दे

1. अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 (आईटीपीए)

2.किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015

3.यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012

4.बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976

5.बाल एवं किशोर श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 (संशोधित 2016)

6.भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के तहत प्रावधान

7.कमियाँ

तस्करी विरोधी प्रयासों की रोकथाम और प्रवर्तन के लिए प्रमुख उपाय

  1. स्कूल और समुदाय-आधारित रोकथाम
  1. परिवहन सतर्कता को मजबूत करना
  1. मानव तस्करी विरोधी इकाइयों (एएचटीयू) में सुधार
  1. श्रम और न्याय तंत्र को मजबूत करना

रोकथाम की दिशा में कदम: “पिकेट” रणनीति (“PICKET” Strategy

बाल तस्करी को समाप्त करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण:

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

भारत में बाल तस्करी केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक ढाँचों की व्यवस्थागत विफलता है। इस संकट से निपटने के लिए एक बहुआयामी रणनीति सुझाइए। (250 शब्द, 15 अंक)

स्रोत: https://www.thehindu.com/opinion/lead/bihars-dark-side-the-hub-of-girl-child-trafficking/article69870523.ece


भारत के औपचारिक विनिर्माण में संविदाकरण (Contractualisation in India’s formal manufacturing) (जीएस पेपर III - अर्थव्यवस्था)

परिचय (संदर्भ)

हाल के दशकों में, भारत के औपचारिक विनिर्माण क्षेत्र ने अपने रोजगार ढांचे में महत्वपूर्ण नकारात्मक परिवर्तन देखा है।

उद्योगों के वार्षिक सर्वेक्षण (एएसआई) के अनुसार, विनिर्माण कार्यबल में ठेका श्रमिकों की हिस्सेदारी 1999-2000 में 20% से बढ़कर 2022-23 में 40.7% हो गई है, जो सभी उद्योगों में है।

संविदाकरण का दुरुपयोग उत्पादकता के लिए हानिकारक है, जिससे दीर्घकालिक उत्पादकता वृद्धि को बनाए रखने के लिए औपचारिकीकरण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर प्रकाश पड़ता है।

संविदात्मक नौकरियाँ (Contractual jobs) क्या हैं?

संविदा मजदूरों के मुद्दे (Issues of contract labours)

संविदाकरण के पीछे प्राथमिक प्रेरणा कौशल या अनुकूलनशीलता को बढ़ाना नहीं है, बल्कि श्रम लागत को कम करना और मूल श्रम कानूनों के तहत कानूनी दायित्वों को दरकिनार करना है।

भारत में ठेका मजदूरों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें असमान वेतन, नौकरी की असुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा लाभों का अभाव और शोषण के प्रति संवेदनशीलता शामिल है।

ये मुद्दे कई कारकों के संयोजन से उत्पन्न होते हैं, जैसे श्रम कानूनों का कमजोर कार्यान्वयन, श्रमिकों में जागरूकता की कमी, तथा अनुबंध रोजगार की अंतर्निहित प्रकृति, जो अक्सर श्रमिक कल्याण की तुलना में लचीलेपन को प्राथमिकता देती है।

कुछ मुद्दों पर नीचे चर्चा की गई है:

उत्पादकता पर प्रभाव

संविदा कर्मचारियों को विशिष्ट भूमिकाओं या अवधि के लिए नियुक्त किया जाता है और ये कंपनियों को, खासकर अस्थिर बाज़ारों में, लचीला बने रहने में मदद करते हैं। ये दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं के बिना, परिचालन को तेज़ी से बढ़ाने या घटाने में मदद करते हैं।

हालाँकि, दीर्घकालिक प्रभाव इस प्रकार हैं:

कुछ अपवादों को छोड़कर, 80% औपचारिक उद्यम अत्यधिक संविदा /ठेका प्रथा के कारण पीड़ित हैं। यह दीर्घावधि में उत्पादकता , रोज़गार सुरक्षा और आर्थिक विकास को कमज़ोर करता है।

आवश्यक कदम

औद्योगिक संबंधों पर श्रम संहिता लागू करना (2020)

लंबी अवधि के निश्चित अनुबंधों को प्रोत्साहित करना:

प्रधानमंत्री रोज़गार प्रोत्साहन योजना (PMRPY):

Value Addition: भारत में संविदा श्रम को नियंत्रित करने वाले कानून

निष्कर्ष

यदि संविदा श्रम का उपयोग उच्च-कौशल वाले क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों के साथ रणनीतिक रूप से किया जाए, तो यह औद्योगिक लचीलेपन में योगदान दे सकता है। हालाँकि, श्रम-प्रधान क्षेत्रों में लागत-कटौती के साधन के रूप में इसका अत्यधिक उपयोग प्रतिकूल परिणाम दे सकता है।

समावेशी विकास और दीर्घकालिक उत्पादकता सुनिश्चित करने के लिए भारत को शोषणकारी अनौपचारिकीकरण से वास्तविक औपचारिकीकरण की ओर बढ़ना होगा।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

“भारत के औपचारिक विनिर्माण क्षेत्र में श्रम का बढ़ता हुआ संविदाकरण (contractualisation) श्रमिकों के कल्याण और औद्योगिक उत्पादकता दोनों को कमजोर करता है।” समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)

स्रोत: https://www.thehindu.com/opinion/op-ed/adopt-formalisation-to-power-productivity-growth/article69870561.ece

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