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DAILY CURRENT AFFAIRS IAS | UPSC Prelims and Mains Exam (हिंदी) – 7th JULY 2020

  • IASbaba
  • July 21, 2020
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Hindi Initiatives
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IASBABA’S INTEGRATED LEARNING PROGRAMME (ILP)

IAS UPSC Prelims and Mains Exam (हिंदी) – 7th July 2020

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(PRELIMS + MAINS FOCUS)


मनरेगा (MGNREGA): आजीविका सुरक्षित करने हेतु आशा की एक किरण 

भाग: GS Mains II and III- सरकार की योजनाएं नीतियाँ; कल्याणकारी योजनाएं; अर्थव्यवस्था और बेरोजगारी के मुद्दे

समाचारों में:

  • लाखों गरीब ग्रामीण परिवारों को मनरेगा (MGNREGA) के तहत उनके 100 दिवसीय कार्य समय से पहले पूर्ण करने के कारण शेष वर्ष हेतु उन्हें इस योजना के तहत अन्य किसी भी प्रकार का कोई लाभ प्रदान नहीं किया जाएगा।
  • अतः इसलिए विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से प्रत्येक परिवार के लिए काम के कोटे को कम से कम 200 दिनों की अवधि तक बढ़ाने का आग्रह किया है।  
  • हजारों बेरोजगार प्रवासी श्रमिकों के अपनेअपने गांव लौटने के कारण मनरेगा (MGNREGA) भत्ता पर उनकी निर्भरता बढ़ गई है।
  • COVID-19 को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के मद्देनजर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मनरेगा को पुनः संघठित (reorient) करने हेतु मांग की है।

Important Value Additions

मनरेगा (MGNREGA) के संबंध में

  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA) को वर्ष 2005 में अधिसूचित किया गया था।
  • लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आजीविका सुरक्षा में सुधार करना।
  • यह एक सार्वभौमिक (Universal) योजना है जो की प्रत्येक इच्छुक ग्रामीण परिवार को वर्ष में 100 दिवसीय मजदूरी रोजगार की गारंटी प्रदान करती है। 
  • यह एक श्रम कानून तथा सामाजिक सुरक्षा उपाय है जिसका उद्देश्य कार्य करने के अधिकार को सुनिश्चित करना है।
  • प्रत्येक पंजीकृत व्यक्ति को किए गए कार्यो की स्थिति जानने के लिए एक जॉब कार्ड (JobCard) प्रदान किया जाता है।
  • ग्रामीण स्तर पर कार्य की माँग होने के कारण इस योजना को ग्राम पंचायत के द्वारा क्रियान्वित किया जाता है। 
  • सर्वप्रथम इस अधिनियम को पी. वी. नरसिम्हा राव (भूतपूर्व प्रधानमंत्री) द्वारा वर्ष 1991 में प्रस्तावित किया गया था।
  • किसी व्यक्ति द्वारा नौकरी का आवेदन मिलने के 15 दिन की अवधि के भीतर यदि उसे रोज़गार प्राप्त नहीं होता है, तो आवेदक को बेरोजगारी भत्ता प्रदान किया जाता है। 
  • आवेदक को उसके निवास के 5 कि.मी. के भीतर रोजगार प्रदान किया जाता है, तथा न्यूनतम मजदूरी का भुगतान किया जाता है।
  • इस प्रकार, MGNREGA के तहत रोजगार एक वैधानिक/ कानूनी अधिकार है।

वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट और संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण कार्यलय (UNODC) 

भाग: GS Prelims and Mains II and III- अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की भूमिका; सुरक्षा मुद्दे

समाचारों में:

संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण कार्यलय (United Nations Office on Drugs and Crime: UNODC) की नवीनतम ड्रग रिपोर्ट के अनुसार

  • वर्ष 2018 में अफीम के ज़ब्तीकरण (seizure) में विश्व में भारत का चौथा स्थान (शीर्ष पांच में) है।
  • अफीम ज़ब्तीकरण (opium seizure) में शीर्ष 3 देशईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान हैं।
  • विगत वर्ष हेरोइन ज़ब्तीकरण में भारत, विश्व में 12 वें स्थान पर था
  • हेरोइन ज़ब्तीकरण के शीर्ष देशईरान, तुर्की, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान।
  • वर्ष 2019 में अफीम की कृषि के तहत वैश्विक क्षेत्र में निरंतर दूसरे वर्ष भी गिरावट आई है।
  • कृषि में गिरावट के बावजूद वर्ष 2019 में अफीम का उत्पादन स्थिर रहा, हालाँकि मुख्य अफीम उत्पादन क्षेत्रों में अत्यधिक उत्पादन हुआ है।
  • विश्व में अवैध रूप से अफीम के उत्पादन का 90% एशिया में होता है ,तथा मादक पदार्थों (opiates) के लिए विश्व का सबसे बड़ा खपत बाजार है।
  • वर्ष 2018 में विश्व भर में ज़ब्त किए गए मादक पदार्थों के लगभग 80% भाग का उत्पादन एशिया में हुआ था।
  • एशिया के बाहर, हेरोइन एवं मोर्फिन की सर्वाधिक मात्रा यूरोप में ज़ब्त की गई है। (वर्ष 2018 में समग्र वैश्विक का 22%)

क्या आप जानते हैं?

  • हेरोइन का निर्माण अफीम पोस्ता (opium poppy plants) के पौधों के अंकुरित बीज (seed pod) से प्राप्त किए गए मॉर्फिन से होता है।
  • लगभग 50 देशों में अफीम का अवैध उत्पादन होता है।
  • हालांकि, विगत पांच वर्षों में अफीम के संपूर्ण वैश्विक उत्पादन का 97% केवल 3 देशों में हुआ था।
  • कुल अफीम का 84% भाग अफगानिस्तान में उत्पन्न हुआ था।
  • म्यांमार में 7% और लाओस में 1% वैश्विक अफीम का उत्पादन होता है। 
  • मेक्सिको में 6%, जबकि कोलंबिया एवं ग्वाटेमाला में 1% से कम का वैश्विक अफीम उत्पादन होता है। 

Pic: अफीम की कृषि

Important Value Additions

संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण कार्यलय (UNODC) के बारे में 

  • UNODC संयुक्त राष्ट्र का कार्यालय है, जिसकी स्थापना 1997 में हुई थी।
  • यह संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समूह का सदस्य है।
  • इस कार्यालय का उद्देश्य ड्रग्स (मादक पदार्थों), अपराध, आतंकवाद, और भ्रष्टाचार से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए सरकारों को बेहतर ढंग से सुसज्जित करना है।
  • (UNODC) के उद्देश्य: वैकल्पिक विकास, भ्रष्टाचारविरोधी, आपराधिक न्याय, कारागार सुधार एवं अपराध निवारण, मादक पदार्थों का रोकथाम, उपचार एवं देखभाल, HIV और एड्स, मानव तस्करी प्रवासी तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग, संगठित अपराध, चोरी, आतंकवाद की रोकथाम।

Pic: UNDOC 


भारतचीन: सीमा रेखा से पीछे हटने की प्रक्रिया (India-China: disengagement process)

भाग: GS Mains II and III- अंतर्राष्ट्रीय संबंध; भारत एवं उसके पड़ोसी; सुरक्षा मुद्दे

समाचार में:

  • भारत एवं चीन ने विशेष प्रतिनिधियों (Special Representatives) की वार्ता के पश्चात सीमा से पीछे हटने (disengagement) की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।
  • पैंगोंग त्सो वर्तमान स्टैंडऑफ के सबसे विवादास्पद क्षेत्रों में से एक है, जहाँ चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) लगभग 8 किमी तक भीतर चली आई थी।
  • दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के अनुसार भारत एवं चीन की सेनाएं विवादित क्षेत्रोंगलवान, पैंगोंग त्सो, हॉट स्प्रिंग्स से पीछे हटेगी।

कोरोनोवायरस एक वायुजनित रोग है: WHO से 239 वैज्ञानिकों ने कहा

भाग: Mains II and III – स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे; विज्ञानस्वास्थ्य एवं चिकित्सा

समाचारों में:

  • 32 देशों के 239 वैज्ञानिकों ने WHO को चेतावनी दी है कि विश्व में कोरोनावायरस का वायुजनित (airborne) होने का बड़ा खतरा मंडरा रहा है, तथा WHO को अपने दिशानिर्देशों में संशोधन करने की आवश्यकता है। 
  • यदि वायुजनित संचरण एक महत्वपूर्ण कारक है, तो विशेषकर खराब वेंटिलेशन वाले भीड़भाड़ वाले स्थानों में वायुजनित संचरण के नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे।

क्या आप जानते हैं?

  • दिए गए तात्कालिक प्रमाण एवं WHO के अनुसार, कोविड-19 वायरस मुख्य रूप से श्वसन बूंदों (respiratory droplets) तथा शारीरिक संपर्कों के माध्यम से लोगों के मध्य फैलता है।
  • वायुजनित संचरण का तात्पर्य है कि कोई व्यक्ति संक्रमित वायु में श्वास लेने के कारण रोग से प्रभावित हो सकता है क्योंकि छोटे रोगजनक (Pathogens) वायु में मौजूद रहते हैं।
  • वायुजनित रोगों के सामान्य उदाहरणों में चेचक वायरस, इन्फ्लूएंजा वायरस, नोरोवायरस और एडेनोवायरस शामिल हैं।

यदि कोरोनावायरस वायुजनित रोग है, तो ध्यान रखने योग्य बातें:

  1. विशेष रूप से घर के अंदर या भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सोशल डिस्टन्सिंग का पालन करते हुए भी फेसकवर एवं फेसमास्क को अनिवार्य किया जा सकता है।
  2. बड़ी सामाजिक सभाओं में जाने से बचना।
  3. कार्यालयों, शैक्षिक संस्थानों और अस्पताल में उचित वेंटिलेशन और वायु पुनर्चक्रण (air recycling) की आवश्यकता पर बल देना।
  4. बंद स्थानों में वायु में निलंबित एयरोसोल को समाप्त करने हेतु पराबैंगनी किरणों का उपयोग करना।
  5. शारीरिक दूरी (Physical distancing) एवं हाथ धोने के अभ्यास को अनिवार्य बनाना।
  6. सभी स्वास्थ्य देखभाल कर्मचारियों के लिए एन-95 मास्क को अनिवार्य करना।

बूबोनिक प्लेग (Bubonic plague)

भाग: GS Prelims and Mains III – विज्ञान: स्वास्थ्य एवं चिकित्सा

समाचारों में:

  • उत्तरी चीन के एक शहर में बुबोनिक प्लेग याब्लैक डेथ‘ (Black Death) के संदिग्ध मामले की सूचना के पश्चात अलर्ट जारी किया गया।

बुबोनिक प्लेग (Bubonic plague) क्या है?

  • यह एक दुर्लभ परंतु गंभीर जीवाणु संक्रमण है, जो कृन्तकों (rodents) से पिस्सू (fleas) में प्रेषित होता है।
  • यह एक पशुजन्य रोग (zoonotic disease) है और इसे अन्य पशुओं या मनुष्यों में प्रेषित किया जा सकता है।
  • इसका प्रेषण संक्रमित पिस्सू (fleas) के काटने से होता है।
  • यह मृत प्लेग द्वारा संक्रमित पशु के शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थ के संपर्क में आने के परिणामस्वरूप भी हो सकता है।
  • यह बैक्टीरियम यरसिनिया पेस्टिस (bacterium Yersinia pestis) के कारण होने वाली तीन प्लेगों में से एक है। अन्य दो सेप्टिकैमिक प्लेग (Septicaemic plague) और न्यूमोनिक प्लेग (Pneumonic plague) हैं।
  • यह यरसिनिया पेस्टिस बैक्टीरिया द्वारा प्रेषित होता है तथा इसके प्रभाव में आने के पश्चात तत्काल रूप से अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है। विश्व स्वास्थ्य संघठन (WHO) के अनुसार, समय पर उपचार नहीं होने के कारण एक व्यस्क की मृत्यु 24 घंटे से भी कम समय में हो सकती है।

इसके लक्षण क्या हैं?

  • अंडे के आकार जैसी सूजी हुई लसिका (lymph) ग्रंथि, जो ऊसंधी (groin), कांख या गर्दन में हो सकती हैं। 
  • इसके अतिरिक्त बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, थकान और मांसपेशियों में दर्द शामिल हैं।

क्या आप जानते हैं?

  • बुबोनिक प्लेग के मानव से मानव में संचरण की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। बुबोनिक प्लेग की रोकथाम के लिए, लोगों को मृत जानवरों को छुने से बचना चाहिए एवं प्रकोप होने पर कीट या पिस्सू प्रतिरोधी कवच पहनना चाहिए।
  • WHO के अनुसार, प्लेग हेतु उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों के लिए बुबोनिक प्लेग का टीका उपलब्ध है।

(मुख्य लेख)


कृषि / शासन / अर्थव्यवस्था

विषय: सामान्य अध्ययन 2,3:

  • विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकार की नीतियाँ एवं हस्तक्षेप
  • भारतीय अर्थव्यवस्था और संसाधनों के नियोजन, संग्रहण से संबंधित मुद्दे

कृषि में आत्मनिर्भरता का एक तरीका (A way to Aatmanirbharta in agriculture)

संदर्भ: 1.37-अरब जनसंख्या वाले भारत जैसे बड़े देश के लिए, अधिकांश खाद्य पदार्थों का उत्पादन घरेलू स्तर पर किया जाता है, अतः इसलिए कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता है। 

क्या आप जानते हैं?

  • 1950 और 60 के दशक के दौरान, भारत एक निर्धन (ship to mouth) देश था, तब वह अपनी खाद्य आवश्यकताओं हेतु अन्य देशों के खाद्य अनुदान पर निर्भर था।
  • हालाँकि, वर्तमान में भारत कृषिउपज का प्रमुख निर्यातक देश है।

1960 तथा वर्तमान स्थिति में अंतर

  • 1960 के दशक में, यदि भारत ने अपने सभी विदेशी मुद्रा भंडार (लगभग 400 मिलियन डॉलर) को केवल गेहूं आयात पर खर्च किया होता, तो यह लगभग 7 मिलियन टन (mt) गेहूं आयात कर सकता था।
  • वर्तमान में भारत के पास 500 बिलियन डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। इसलिए, यदि भारत 20 मिलियन टन गेहूं 250 डॉलर /टन की लागत पर आयात करता है तो, इसकी लागत केवल 5 बिलियन डॉलर होगी, जो कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का केवल 1% है।
  • इसलिए, विगत तीन दशकों का सबसे बड़ा सुधार जिसने खाद्य पदार्थों में भारत को आत्मनिर्भरता प्रदान कि वह है विनिमय दरों में सुधार और साथ ही, भारत का विश्व अर्थव्यवस्था के साथ क्रमिक एकीकरण।

भारत में कृषिव्यापार परिदृश्य

  • विगत 10 वर्षों में (2010-11 से 2019-20) में भारत कृषिउत्पादों का निर्यातक रहा है। वास्तव में, 1991 में आर्थिक सुधारों के प्रारंभ होने के पश्चात ही ऐसा हुआ है
  • वर्ष 2013-14 कृषिव्यापार हेतु स्वर्णिम वर्ष रहा है, जब निर्यात 43.6 बिलियन डॉलर और आयात 18.9 बिलियन डॉलर था, अतः उस समय 24.7 बिलियन डॉलर का शुद्ध व्यापार अधिशेष मौजूद था।
  • विगत पांच वर्षों से कृषि निर्यातों में निरंतर गिरावट आई है।
  • वर्ष 2019-20 में कृषिनिर्यात केवल 36 बिलियन डॉलर था, और शुद्ध कृषिव्यापार अधिशेष 11.2 बिलियन डॉलर था।

आगामी वर्षों में कृषिव्यापार अधिशेष में किस प्रकार वृद्धि जाए?

  1. तुलनात्मक लाभ” (comparative advantage) के सिद्धांत पर आधारित कृषिव्यापार नीति।
  • इसका तात्पर्य है कि वर्चस्व (जहाँ भारत अधिक प्रतिस्पर्धी है) वाले उत्पादों का अधिकाधिक निर्यात, तथा जहाँ हम निम्न प्रतिस्पर्धा में हैं, आयात करना।
  • वर्ष 2019-20 का वर्तमान कृषिनिर्यातप्रकट तुलनात्मक लाभ” (revealed comparative advantage) होने की संभावना को उजागर करता है।
  • इस सूची में समुद्री उत्पाद (6.7 बिलियन डॉलर के निर्यात के साथ) सबसे ऊपर हैं और इसके पश्चात चावल (6.4 अरब डॉलर), मसाले (3.6 अरब डॉलर), भैंस का मांस (3.2 अरब डॉलर), चीनी (2.0 अरब डॉलर) का स्थान आता है।
  1. सब्सिडी का विविधीकरण
  • निःशुल्क विद्युत और अत्यधिक रियायती उर्वरकों (विशेषकर यूरिया) के माध्यम से चावल एवं चीनी को भारी सब्सिडी प्रदान की जाती है।
  • विद्युत और उर्वरक सब्सिडी प्रति हेक्टेयर आधार पर उत्पादित किए जा रहे चावल और चीनी के मूल्य का लगभग 10-15% है।
  • इससे पानी का आभासी निर्यात (virtual export) हो रहा है क्योंकि एक किलोग्राम चावल की सिंचाई के लिए 3,500-5,000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है तथा एक किलोग्राम चीनी में लगभग 2,000 लीटर पानी की खपत होती है  
  • हालाँकि, उच्च मूल्य वाले कृषिउत्पादों जैसे फलों एवं सब्जियों, मसालों, चाय और कॉफी, या कपास इत्यादि के निर्यात को इस प्रकार का समान प्रोत्साहन प्रदान नहीं किया जाता है। अतः इन फसलों को भी सब्सिडी प्रदान करने की गहन आवश्यकता है।
  1. ताड़ के तेल को बढ़ावा देना (Giving boost to Oil Palm)
  • कृषिआयातों में, खाद्य तेल का मूल्य लगभग 10 बिलियन डॉलर (मात्रा के हिसाब से, लगभग 15 मिलियन टन) सर्वाधिक है।
  • अतः तिलहन से तेल के उत्पादन एवं पुनर्प्राप्ति अनुपात को बढ़ाने तथा ताजे गुच्छों से ताड़ के तेल के उत्पादन में वृद्धि करने की आवश्यकता है।
  • जबकि सरसों, सूरजमुखी, मूंगफली, कपास के बीज से भी उत्पादन में वृद्धि करने की क्षमता है, परंतु वास्तविक क्षमता ताड़ के तेल के दोहन में है।
  • पाम ऑयल (Oil Palm) एकमात्र ऐसा पौधा है, जिसमें प्रति हेक्टेयर भूमि पर लगभग चार टन तेल का उत्पादन हो सकता है।
  • भारत में लगभग दो मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र पाम ऑयल के उत्पादन के लिए उपयुक्त है, जिससे 8 मिलियन टन पाम ऑयल प्राप्त हो सकता है। 

निष्कर्ष

सरकार को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए पाम ऑयल के उत्पादन पर ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता है।

Connecting the dots:

  • RCEP समझौते में सम्मिलित होने हेतु वार्ता के संदर्भ में, डेयरी क्षेत्र एवं इसकी चुनौतियाँ।
  • अशोक दलवई समिति।

शासन / अर्थव्यवस्था / समाज

विषय: सामान्य अध्ययन 2:

  • विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकार की नीतियाँ हस्तक्षेप
  • भारतीय अर्थव्यवस्था और संसाधनों के नियोजन, संग्रहण से संबंधित मुद्दे

उत्प्रेरित आजीविका जोखिम में कमी लाना (Rolling back the induced livelihood shock)

संदर्भ : लॉकडाउन के दौरान, भारत के निम्न विशेषाधिकृत कार्यबल (less-privileged workforce) को आय में गिरावट एवं आजीविका के साधनों में हानि का सामना करना पड़ा है।

महामारी से पूर्व मौजूद गरीबी संबंधी मुद्दे

  • गरीबी रेखा (Poverty Line): भारत की गरीबी रेखा अपनी गैरवास्तविक निम्नतम सीमा (unrealistically low thresholds) के कारण वादविवाद का विषय रही है, यह गरीबों की संख्या को कम प्रदर्शित करती है।
  • अनियमित अद्यतन (Irregular Updation): सरकारी गरीबी रेखा को अनियमित रूप से अद्यतन करने और हाल के वर्षों में राष्ट्रीय सैंपल सर्वेक्षणों से उपभोग व्यय के आंकड़ों की अनुपलब्धता के कारण गरीबी के अनुमान में स्पष्टता का अभाव है। 

भारत में गरीबी की संभावित सीमा क्या हो सकती है?

  • आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण  (PLFS) 2017-18 (जो NSSO के रोजगारबेरोजगारी सर्वेक्षणों को प्रतिस्थापित करता है) और राज्यविशिष्ट गरीबी रेखाओं (वर्तमान मूल्य सूचकांकों के साथ समायोजित, जिसका तेंदुलकर समिति की अनुशंसाओं के आधार पर वर्ष 2011 में तत्कालीन योजना आयोग द्वारा उपयोग किया गया था) के अनुसार, लॉकडाउन की घोषणा से पूर्व लगभग 42% या लगभग 56 करोड़ लोगों को गरीब वर्ग में सम्मिलित थे।
  • अन्य 20 करोड़ लोग जो गरीबी रेखा से 20% ऊपर एक संकरी पट्टी के भीतर थे, वे लोग उपभोग व्यय वितरण (consumption expenditure distribution) के निचले आधे हिस्से की ओर चले गए हैं।

महामारी के कारण गरीबी में वृद्धि हो रही है (Poverty Deepening due to Pandemic)

  • आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) द्वारा वर्ष 2020 के लिए दिए गए कुछ आंकड़ों से ज्ञात होता है कि लॉकडाउन ने लगभग 40 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से नीचे धकेल दिया गया है।
  • इस लॉकडाउन से प्रेरित नए गरीब लोगों में से लगभग 12 करोड़ शहरी क्षेत्रों में मौजूद हैं तथा अन्य 28 करोड़ लोग ग्रामीण क्षेत्रों में हैं।
  • जो लोग पहले से ही गरीब थे, उनकी जीवन यापन की गुणवत्ता और भी अधिक ख़राब हो रही है। 
  • लॉकडाउन से पूर्व, लगभग 16% जनसंख्या का प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय, गरीबी रेखा का भी लगभग एक तिहाई था, जिनका दैनिक व्यय 30 रूपये/ प्रतिदिन या उससे भी कम था। 
  • लॉकडाउन के पश्चात लगभग 62 करोड़ से अधिक (47%) लोगों को अत्यधिक गरीबी का सामना करना पड़ सकता है।

गरीबी बढ़ने से रोकथाम हेतु राज्य की प्रतिक्रिया क्या होनी चाहिए?

  1. ग्रामीण जीवन में सुधार करने के लिए नरेगा (NREGA) को पुनर्जीवित और विस्तारित करना। 
  • ग्रामीण श्रम आपूर्ति में रिवर्स माइग्रेशन (विपरीत प्रवास) से वृद्धि होने के साथ काम की मांग (demand for work) के 25% तक बढ़ने का अनुमान है।
  • पुनर्संरचित योजना के अंतर्गत 90 मिलियन श्रमिकों को न्यूनतम आगामी छह महीने के लिए 20 दिनों के कार्य/ प्रति माह की रोजगार गारंटी प्रदान करने की आवश्यकता है।
  • इसके लिए 1.6 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन की आवश्यकता है।
  1. सार्वजनिक वितरण प्रणाली का सार्वभौमीकरण (Universalisation of the Public Distribution System)
  • दिल्ली में गैरराशन कार्ड धारकों के लिए खाद्य कूपन के विस्तार के हालिया अनुभव से पता चलता है कि इस प्रकार के उपायों से हाशिए पर रहने वाले समुदायों की स्थिति में सुधार किया जा सकता है। 
  • इस प्रकार, PDS के माध्यम से खाद्य वितरण के कार्यान्वयन को न्यायसंगतता (equity) पर केंद्रित किया जाना चाहिए।
  1. शहरी अर्थव्यवस्था को स्थिर करना
  • महामारी के कारण शहरी क्षेत्रों से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवासन (reverse migration) शहरी अर्थव्यवस्था में अस्थिरता ला सकता है।
  • शहरी रोजगार गारंटी कार्यक्रम का कार्यान्वयन शहरी अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए आवश्यक हो गया है।
  • नगर निगमों के माध्यम से प्रत्यक्ष रोजगार कार्यक्रम को प्रारंभ किया जाना चाहिए, जिसके तहत प्रति माह 20 दिनों के काम की गारंटी को सुनिश्चित किया जा सकता है।
  • इसका उपयोग शहरी क्षेत्रों में मुख्य सामाजिक मुलभूत अवसंरचना जैसे स्लम विकास, पेयजल आपूर्ति, शौचालय निर्माण, पार्क और सामान्य क्षेत्र, शहरी वनीकरण और सामाजिक वानिकी को विकसित करने हेतु किया जा सकता है।
  • न्यूनतम मजदूरी राज्य में प्रचलित मनरेगा के तहत औसतम मजदूरी का 30% प्रीमियम के तौर पर निर्धारित की जानी चाहिए।
  • MSME के नियोक्ताओं को अपने व्यवसायों को पुनर्जीवित करने हेतु नकदी हस्तांतरण जैसी सब्सिडी प्रदान की जा सकती है।

निष्कर्ष

यदि आर्थिक प्रगति और विकास कार्यक्रमों को पुनर्संगठित नहीं किया गया तो बढ़ती भूख से होने वाली मृत्यु एवं विनाश के कारण स्थिति गंभीर हो सकती हैं, जिससे सामाजिक अशांति एवं अपराधों में वृद्धि होगी।

Connecting the dots:

  • खाद्य कूपन बनाम सब्सिडी वाले खाद्य प्रावधान (Food Coupons Vs Subsidised Food provision)
  • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण
  • आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS)

(TEST YOUR KNOWLEDGE)


मॉडल प्रश्न: (You can now post your answers in comment section)

ध्यान दें

  • आज के प्रश्नों के सही उत्तर अगले दिन के DNA सेक्शन में दिए जाएंगे। कृपया संदर्भित कर अपने उत्तर अपडेट करें।
  • Comments Up-voted by IASbaba are also the “correct answers”.

Q.1 अवैध अफीम उत्पादन के संबंध में गोल्डन क्रीसेंट (Golden Crescent) एशिया के दो प्रमुख क्षेत्रों में से एक है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन से देश सम्मिलित हैं?

  1. वियतनाम
  2. लाओस
  3. थाईलैंड

सही कूट का चयन कीजिए:

  1. 1 और 2     
  2. 2 और 3     
  3. 1, 2 और 3     
  4. उपरोक्त में से कोई नहीं    

Q.2 मनरेगा योजना के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. यह एक सार्वभौमिक योजना है जो प्रत्येक इच्छुक ग्रामीण परिवार को वर्ष में 100 दिन के मजदूरी रोजगार की गारंटी देती है। 
  2. यह योजना ग्राम पंचायत द्वारा कार्यान्वित की जाती है।
  3. मनरेगा (MGNREGA) के तहत रोजगार एक वैधानिक/ कानूनी अधिकार है।

उपर्युक्त कथनों में कौन सा/ से सही हैं?

  1. केवल 1     
  2. 2 और 3     
  3. 1 और 3     
  4. 1, 2 और 3    

Q.3 बुबोनिक प्लेग के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. यह एक पशुजन्य रोग (zoonotic disease) है तथा इसे अन्य पशुओं या मनुष्यों में प्रेषित किया जा सकता है।
  2. यह एक गंभीर वायरल संक्रमण (viral infection) है, जो कृंतकों से पिस्सू में प्रेषित होता है।
  3. इस रोग के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। 

उपर्युक्त कथनों में कौन सा सही हैं?

  1. केवल 1     
  2. 2 और 3     
  3. 1 और 2     
  4. 1, 2 और 3    

ANSWERS FOR 6th July 2020 TEST YOUR KNOWLEDGE (TYK)

1 D
2 D
3 C

अवश्य पढ़ें:

भारत के विदेशी संबंधों के ऐतिहासिक दृष्टिकोण के बारे में:

The Hindu

तमिलनाडु में हिरासत में हुई (कस्टोडियल) मृत्यु के मद्देनजर पुलिस हिंसा के बारे में:

The Hindu

भारत और चीन के बीच तनाव में कमी (de-escalation) के बारे में:

The Indian Express

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